World Soil Day Program by Brahma Kumaris Dhamtari

Dhamtari ( Chhattisgarh ): On World Soil Day, the Brahma Kumaris of Dhamtari arranged a program to discuss “Conservation of Soil through Consistent Yogic Farming.” The Chief Guest was Mr. Premlal Sahu, Agricultural Expert, Agriculture Science Centre, Dhamtari; and Mr. Manoj Sahu, Rural Agriculture and Village Development Officer; Mr. Navin Tarar, Rural Agriculture and Village Development Officer, Dhamtari; were the other guests along with BK Sarita, Dhamtari Zonal in Charge, who participated.

The function was commenced by lighting inaugural lamps. BK Sarita said, “This day has been dedicated to conserve, promote and develop the soil. Out of 5 natural Elements, Earth or Soil is considered to be most important. Today soil quality has become spoiled. If Mother Earth falls sick then how can her children, men and women, be safe and sound. Therefore we must take up some solid step to save and preserve the Soil. The Rural and Agricultural Wing of Brahma Kumaris is striving to enlighten people to protect the environment through a “Consistent Yogic Farming” campaign which will be continued further. By this yielding, the power of soil can be enhanced.  This Project was initiated by the Agriculture and Rural Development Wing of Brahma Kumaris in the year 2007 as a New Step for a New Era.”

She said, “There is a deep relationship  between Nature, Man and God since time immemorial. Human life becomes delightful when there exists harmony between Man and Nature. Along with Nature if a bond is developed with God (Creator) then this Earth would become a Paradise. Farmers associated with Brahma Kumaris empower and purify all five Elements, Environment and their Fields by projecting powerful vibrations through Rajayoga meditation.” She inspired all the farmers to learn Rajayoga Meditation.

Mr. Premlal Sahu said, “Soil is such a thing that it is necessary to be kept alive. Farmers are not able to understand the loss they are getting by burning off the soil. The Prime Minister has developed a Soil Card — which can assess the strength of the Soil; accordingly, the quantity of manure to be used can be decided — a praiseworthy step taken by him. By Organic Farming we can keep the Soil alive. We have to save it alive for the next generation. We must not make it dead. During Corona we saw that people needed only two items, medicine and food, the rest of the things were forgotten. See how very important the role of farmers is. So we must lend our help to them.”

Mr. Manoj Sahu said that soil is getting spoiled by chemical farming; as a result investment is increasing, diseased crops are increasing. Therefore this Soil Day is being observed to awaken the farmers.

Mr. Navin Tarar stated that earlier, Farming was done to the extent required. A time arrived when the Government thought of producing more food, resulting in a Green Revolution. For that fertilizer was to be given as a tonic but we gave it like Food. So the Field became more of a Wasteland. In earlier days only land and seeds were needed to do cultivation, but now it has become very strenuous and costlier.

At the end of the program, BK Saras guided everyone to take an oath. BK Navnita guided the audience in saying inspiring slogans for the occasion. BK Kamini Kaushik directed the whole function.
News in Hindi:

धमतरी :

5 दिसम्बर मृदा दिवस के उपलक्ष्य में ब्रह्मकुमारिज धमतरी द्वारा शाश्वत योगिक खेती द्वारा मिटटी का संरक्षण विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया |जिसमे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे प्रेमलाल साहूजी , विषयवस्तु विशेषज्ञ कृषि विज्ञानं केंद्र ,धमतरी , मनोज साहूजी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी , नविन तरार जी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी ,धमतरी,ब्रह्माकुमारी सरिता दीदीजी ,मुख्या संचालिका , ब्रह्मकुमारिज, धमतरी क्षेत्र

कार्यक्रम का शुभारम्भ परमात्म स्मृति से दीप प्रज्वलित कर किया गया | अपने मुख्य उद्बोधन में सरिता दीदी,कृषि एवम ग्राम विकास प्रभाग,क्षेत्रीय समन्वयक ,इंदौर जोन ने कहा आज का ये दिवस मिटटी को समर्पित,आज का संकल्प मिटटी के संरक्षण,संवर्धनऔर सुधर के लिय समर्पित है |प्रक्रति के संसाधनों में सबसे पहला और मुख्य संसाधन मिटटी को माना गया है |जब भी प्रक्रति के 5 तत्वों की बात आती है तो हम पहले भूमि ही कहते है |हम सभी जानते है की आज मिटटी ही हालत ठीक नहीं है तो मनुष्य की हालत कैसे ठीक होगी |कहते है ना धरती माँ यदि माँ ही बीमार है तो बच्चो का क्या होगा | इसलिय हम सभी को मिलकर कुछ ठोस कदम मिटटी के स्वास्थ्य के लिय उठाना पड़ेगा |इस दिशा में प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय का कृषि एवम ग्राम विकास प्रभाग  पर्यावरण जाग्रति के लिए बहुत प्रयास कर रहा है औत सतत इस कार्य को आगे बढ़ा रहा है |शाश्वत योगिक खेती द्वारा मिटटी की उर्वरकता को बचाया जा सकता है |सन 2007 में ब्रह्मा कुमारिज के  कृषि एवम ग्राम विकास प्रभाग द्वारा नए युग के लिए नया कदम –शाश्वत योगिक खेती ये प्रोजेक्ट चलाया गया |  अनंत कल प्रक्रति,पुरुष और परमात्मा का गहरा सम्बन्ध है |प्रक्रति और मनुष्य में बेहतर तालमेल होगा तो मनुष्य जीवन सुखमय हो जायेगा |और प्रक्रति के साथ प्रक्रति पति परमात्मा से सम्बन्ध होगा तो ये धरा स्वर्ग बन जाएगी | ब्रह्मकुमारिज से जुड़े किसान भाई बहने  मैडिटेशन के माध्यम से परमात्मा के शक्तिशाली प्रकम्पन पुरे वायुमंडल में फैलाकर वातावरण ,प्रक्रति के पांचो तत्वों का  शुद्धिकरण करते है | सभी किसान भाई बहनों को मैडिटेशन सिखने के लिए दीदीजी ने प्रेरित किया |

मुख्य अतिथि के रूप में पधारे प्रेमलाल साहूजी , विषयवस्तु विशेषज्ञ कृषि विज्ञानं केंद्र ,धमतरी, ने कहा मृदा एक ऐसा जीव है जिसको जीवित रखना आवश्यक है |मिटटी को जला देने से कितना नुकसान होता है ये किसान समझ नहीं पा रहा है |प्रधानमंत्री जी ने मृदा का स्वास्थ्य ठीक रखने की दिशा में एक बहुत सराहनीय कदम उठाया |उन्होंने मिटटी का मृदा कार्ड बनाया जिससे मिटटी का स्वास्थ्य पता चलता है और उस अनुसार उसमे कितना खाद डालना है ये देखा जाता है |जैविक खेती करके हम मिटटी को सजीव रख सकते है |आने वाली पीढ़ी के लिए हमें सजीव मिटटी बचानी है ,उसे निर्जीव नहीं करना है |इस कोरोना काल में हम सभी ने देखा लोगों को दो ही चीजो की सबसे जादा जरुरत थी दवाई और भोजन |बाकि सब भूल गए थे |तो सोचो हमारे किसानो क कितना महत्व है ,हमें भी उनको मदत करना है | मनोज साहूजी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी ने कहा रासायनिक खेती से मिटटी पूरी तरीके से ख़राब होती जा रही है,कृषि में लगत बढती जा रही है ,बिमारिया बढती जा रही है,इसलिय लोगों को जागरूक करने के लिए ये दिवस मनाया जाता है | नविन तरार जी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी ने कहा पहले हमें जितना अन्न की जरुरत होती थी उतना पैदा किया जाता था |एक समय ऐसा आया शासन के मन में आया हमें अधिक पैदावार लेनी है तो हरित क्रांति हुई |हरित क्रांति में खाद टोनिक के रूप में देना था लेकिन हमने भोजन के रूप में दिया इसलिय जमीं बंजर हो रही है |पहले खेती के लिय सिर्फ जमीं और बीज की आवश्कता होती थी आज खेती बहुत मेहनत देने वाली और महंगी होती जा रही है |

कार्यक्रम के अंत में ब्रह्माकुमारी सरस बहन ने सभी को प्रतिज्ञा कराई,ब्रह्माकुमारी नवनीता बहन ने सभा में उपस्थित सभी से नारे लगवाए |कार्यक्रम का संचालन कामिनी कौशिक ने किया |