“The Way We Think Decides Our Destiny” – A Motivational Workshop in Gwalior

Gwalior ( Madhya Pradesh ): A motivational workshop was arranged for doctors and hospital staff of Global Speciality Hospital in Gwalior.

Senior Rajyoga teacher BK Prahlad  attended the programme. BK Prahlad explained the participants in detail regarding: Who am I? and Where I’m from? In addition to this he also explained the philosophy of the soul as well as the philosophy of karma. He described that the thought we cherish occupies our sub-conscious mind in the form of fear, contemplation or anger. If negative thought preoccupies our mind our speech and action become negative and vice-versa. We therefore need to refine/rectify our negative thoughts since our thoughts decide our destiny. Elevated thoughts, elevated contemplation are keys to elevated action and responsible for building our personality.

Providing tips to overcome stress BK Prahlad discussed about the details of Rajayoga and the benefits of it by conducting a practical session of Rajayoga for all.

The Director of the hospital Dr Sunil Gajendra Gadkar (Sr Heart Specialist) and Joint Director Dr Sneha Gadkar expressed their good wishes and wished that such programs should be conducted from time to time to recharge the mind with positive energy.

In Hindi:

“जैसा हम चिंतन करते हैं वैसा ही हम बनते जाते हैं” – बी.के. प्रहलाद

ग्वालियर: “ग्लोबल स्पेसिलिटी हॉस्पिटल” में डॉक्टर्स एवं हॉस्पिटल स्टाफ के लिए एक मोटिवेशनल कार्यक्रम का आयोजन किया गया | जिसमें ब्रह्माकुमारीज संस्थान से सीनियर राजयोग टीचर बीके प्रहलाद भाई को आमंत्रित किया गया | भाई जी ने सभी को मैं कौन हूँ ? कहाँ से आया हूँ ? इसके बारे में सभी को विस्तार से बताया | साथ ही “Philosophy of soul” और ‘’Philosophy of karma” के रहस्य को भी स्पष्ट किया | कि जैसा हमारा चिंतन होता है वही हमारे अवचेतन मन में आ जाता है चाहे डर हो ,चिंता हो, क्रोध हो | यदि मन में नेगेटिव विचार चल रहे होते हैं तो हमारे नेगेटिव बोल और कर्म होते हैं यदि सकारात्मक विचार चल रहे होते हैं तो हमारे बोल व कर्म सकारात्मक होते हैं | हमें सिर्फ अपने चिंतन को करेक्ट करना हैं “जैसा हम चिंतन करते हैं वैसा ही हम बनते जाते हैं|” क्यों कि श्रेष्ठ चिंतन, श्रेष्ठ विचार ही श्रेष्ठ कर्म व श्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं | वर्तमान समय प्रत्येक व्यक्ति दूसरों से यही उम्मीद करता है कि सब मुझे प्रेम करें मेरा सम्मान करें तो इसके लिए सबसे पहले हमें जो हम दूसरों से अपने लिए उम्मीद करते हैं वह स्वयं दूसरों को देना सीखना होगा क्यों कि जो हम देते हैं वही हमारे पास वापस होकर आता है | साथ ही आज से हमें किसी भी व्यक्ति विशेष की कमियां देखने से पहले उसके गुणों को देखना है और गुणग्राही बनना है तभी स्वयं में हम गुणों की अनुभूति कर सकेंगे | और सभी को अंडरलाइन करवाया कि ख़ुशी के लिए कार्य नहीं करना है वल्कि खुश होकर कार्य करना है क्यों कि ख़ुशी किसी वस्तु, वैभव या व्यक्ति से मिलने वाली चीज़ नहीं है अगर मिलती भी है तो वह अल्पकाल के लिए होती है| ख़ुशी हमारी स्वयं की प्रॉपर्टी है, गुण है | इसके साथ ही तनाव से कैसे मुक्त रहे इसके लिए भी कुछ टिप्स दिए कार्यक्रम के अंत में भाई जी ने सभी को राजयोग मैडिटेशन के बारे में सभी को गहराई से बताया व उससे होने वाले फायदे स्पष्ट किये और सभी को राजयोग मैडिटेशन की अनुभूति भी कराई |

इस अवसर पर हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. सुनील गजेन्द्र गड़कर (वरिष्ठ ह्रदय रोग विशेषज्ञ) एवं सह निदेशिका डॉ. स्नेहा गडकर ने भी अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की और साथ ही कहा कि ऐसे कार्यक्रम बीच बीच में होते रहना चाहिए जिससे मन को सकारात्मक उर्जा मिलती है | और हम शांति की अनुभूति करते रहते है |