Spiritual Significance of Ganesh Chaturthi Festival by Brahma Kumaris Khimlasa, Madhya Pradesh

Khimlasa ( Madhya Pradesh ): The Brahma Kumaris of Khimlasa held a Webinar at their Centre on the subject “Vighna Vinashak Sthiti” (State of Destroyer of Obstacles).

On this occasion, the Centre in Charge BK Janaki said, the “Ganesh Festival itself fills everyone with joy, excitement and enthusiasm.”

Talking on the subject she said, the “Entire life and personality of Sri Ganapathi consists in itself many hidden secrets. His magnificent forehead signifies Intelligence. It says we must always have a Broad Intellect in life.

Small Eyes are for Concentration and Sharp Sight in whatever we do. We must pay full Attention and Concentrate Mind on achieving our Goals in life.

Large Ears signify Good Listening. It means we must never Listen and Keep in Mind any Criticism or Evil of others.

Long Trunk stands for Dexterity telling us that always we must have Work Efficiency in the field we are in. That itself gets us Recognition.

Similarly Small Mouth directs us to Speak Less, Softly and to the Point.

His Single Tusk says to Retain Good Things and Discard the Bad.

Enlarged Belly indicates, Digest Everything and must Accept as a Witness Whatever is Happening.

Laddu is the Symbol of Joy. It teaches us never to lose our Happiness and Joy at any cost, under any Critical Situations.

Tilak applied on the Forehead of Ganesh reminds us that we are a Soul and must ever be Soul Conscious.”

Further she said, “Ganesh, having Four Hands, is holding an Axe in one, this is to Cut off all Physical Bondages and to Win over the Problems in Life. Rope in another hand, is indicative of how to achieve the Higher Goals. With the third hand, He is Blessing, it means we must always Wish for Other’s Welfare and keep Blessing them. Laddu known as Modak in Fourth Hand, resembles the Sweet Result of Good Hard Works and Penance we do. For these very Specialities Lord Ganesh is being worshiped all around the world.”

“The Rat under His command, shown as His Vehicle, represents all our Desires. If we can have the Control and Restraint over our Desires and Imbibe His Qualities and Specialities, our Life will also become Benevolent and Vighna Vinashak like Sri Ganesh. Thus the complete Personality of Lord Ganesh is a Mine of Virtues,” she said.

BK Janaki said, “We have been worshiping Ganapathi Bappa for so many years but still all our bad Virtues are there in us as before. So this year, apart from doing only His Pujan at every home, let us pledge that we shall make our Lives Nobler and Successful.”

The Webinar was very beneficial for many people who took benefit from Brahma Kumaris centers of Bina, Khurai, Pathhari and Khimlasa.

News in Hindi:

श्रीगणेशजी की विशेषताओं को धारण करेंगे तो जीवन बनेगा विघ्न विनाशक
– गणेश चतुर्थी पर विघ्न विनाशक स्थिति का रहस्य विषय पर ऑनलाइन बेवीनार का आयोजन
– बीके जानकी दीदी ने बताया गणेश चतुर्थी पर्व का आध्यात्मिक रहस्य

खिमलासा/बीना : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के खिमलासा सेवाकेंद्र पर गणेश चतुर्थी पर ऑनलाइन बेवीनार का आयोजन किया गया। विघ्न विनाशक स्थिति विषय पर आयोजित बेवीनार में सेवाकेंद्र संचालिका बीके जानकी दीदी ने कहा कि श्रीगणेश उत्सव आते ही सभी के मन में हर्षोल्लास छा जाता है। गणपतिजी का पूरा जीवन और व्यक्तित्व अनेक रहस्यों को समेटे हुए है।
श्रीगणेशजी का भव्य मस्तक बुद्धिमत्ता का प्रतीक है जो हमें सिखाता है कि जीवन में सदा विशाल बुद्धि रखें। छोटी आंखें एकाग्रता और सूक्ष्म दृष्टि का प्रतीक हैं जो सिखाती हैं कि अपने लक्ष्य के प्रति सदा एकाग्रता रखनी चाहिए। बड़े कान बेहतरीन श्रवण शक्ति का प्रतीक हैं अर्थात् किसी की निंदा, बुराई को अपने अंदर समां लें। लंबी सूंड कार्यकुशलता का प्रतीक है। हम जिस क्षेत्र में हैं, उसमें कार्यकुशल होना जरूरी है। इसी से व्यक्ति की पहचान बनती है।
उन्होंने कहा कि इसी तरह छोटा मुंह कम बोलने का प्रतीक है अर्थात् जितना जरूरी हो उतना ही बोलना चाहिए। एकदंत अर्थात् बुरी चीजों का त्याग और अच्छी चीजों को बनाए रखना। बड़ा पेट संदेश देता है कि जीवन में जो हो रहा है उसे साक्षी भाव से स्वीकारना चाहिए। लड्डू खुशियों का प्रतीक हैं, जीवन में कितने भी विघ्न आएं लेकिन अपनी खुशी गायब नहीं होने दें। तिलक आत्म स्मृति की प्रतीक है जो हमें सदा आत्मभान में रहने का संदेश देता है।
बीके जानकी दीदी ने कहा कि इसी तरह गणेशजी के चार हाथ दिखाए गए हैं। एक हाथ में कुल्हाड़ी है अर्थात् जीवन में सभी प्रकार के बंधनों को कैसे काटें और विघ्नों को दूर करें। दूसरे हाथ में रस्सी है जो सिखाती है कि उच्च व श्रेष्ठ ध्येय के समीप कैसे पहुंच सकते हैं। वरदहस्त अर्थात् ज्ञाननिष्ठ स्थिति एवं पराकाष्टा, सदैव शुभ भावना देते रहना, जीवन में सदा दूसरों को दुआएं देना। लंबोदर अर्थात् समाने की क्षमता। प्रसाद है साधना का फल, इन्हीं विशेषताओं के कारण आज सारा जग गणपति के प्रति समर्पित है।
मूषक की सवारी से तात्पर्य है कि इच्छाओं पर नियंत्रण और संयम कैसे रखें। इस तरह गणपति जी का पूरा व्यक्तित्व ही गुणों की खान है। जब हम इन गुणों और विशेषताओं को धारण करेंगे तो हमारा जीवन भी श्रीगणेश के समान मंगलकारी, विघ्न विनाशक बन जाएगा।
जीवन महान बनाने का लें संकल्प
उन्होंने कहा कि हम वर्षों से बप्पा की आराधना करते आए हैं लेकिन आज भी जीवन में पहले की तरह बुराइयां व्याप्त हैं। इसलिए इससाल घर-घर आराधना के साथ अपना जीवन में विघ्न विनाशक की तरह महान बनाने, उनके जीवन से सीख लेकर इसे सफल बनाने का संकल्प लें।
इस दौरान बीना, खुरई, पठारी और खिमलासा सेवाकेंद्र से जुड़े अनेक भाई-बहनों ने ऑनलाइन बेवीनार का लाभ लिया।