“Role of Religion in Creating a Fearless Atmosphere” – Seminar by Brahma Kumaris Alirajpur

Alirajpur ( Madhya Pradesh ): The Alirajpur service center of Brahma Kumaris held a religious seminar on the topic “Role of Religion in creating a fearless atmosphere.” The city residents joined in online to participate and benefit from this initiative.

BK Narayan, Keynote speaker from Indore, said that today people live in fear and stress. Due to this, many diseases manifest in their lives. Due to lack of understanding of the real meaning of religion,  people are unable to benefit from it. Imbibing the highest human values is true religion.  Where purity and cleanliness of mind and body are the basis of life, no fear can prevail.  Peace and happiness follow easily.

BK Madhuri, Incharge of the local Brahma Kumaris, said that the coronavirus pandemic has unleashed fear amongst people.  Remembering the Supreme Soul is an effective way to get rid of fear.

BK Ramnath, Coordinator of the Religion Wing of the Brahma Kumaris from Mount Abu, in his address, said that Meditation and Yoga are essential for Spiritual achievement of any kind. It is the only method to turn inwards. Today, most people feel disconnected from religion. Meditation and Yoga can help bridge this gap.

Mr. Santosh from Gayatri Parivar said that where Universal truth exists, no fear can prevail.  Spirituality has the power to cut out all negativity.

Ms. Poornima, Head of Madhya Pradesh Mahila Ikai and Brahmin Samaj, said that we must strive to give happiness to others always in order to  become fearless.  Wrong actions lead to fear. We must avoid these.

Mr. Bheru Singh Chauhan of Rajput Samaj said that experiencing real peace is true religion.

Mr. Anil Jain from Jain Samaj said that positive thoughts can lead to a fearless life. Non-violence, truth, restraint and discipline are the basis of religion.  One who follows these is always fearless.

BK Arjun presented a beautiful song on the unity of all religions at the end of this program.

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सत्य ज्ञान जीवन को निर्भय बनाता है – ब्रह्मा कुमार रामनाथ भाई

पवित्रता व स्वच्छता  शक्तिशाली जीवन का आधार है-  ब्रह्मा कुमार नारायण भाई

भय मुक्त  वातावरण बनाने में  धर्म का योगदान विषय पर धर्म सम्मेलन

अलीराजपुर : वर्तमान समय संपूर्ण मानव समाज भय ,चिंता, डर का जीवन जी रहे हैं जिसके कारण अनेक मानसिक, शारीरिक व सामाजिक रोग खरपतवार की तरह पैदा होते जा रहे हैं । इसका समाधान सिर्फ धर्म व अध्यात्म में है । इसीलिए जनमानस जीवन की शांति, खुशी के लिए धर्म का सहारा लेते हैं । वर्तमान में धर्म का सही रूप नहीं होने के कारण इसकी सत्य व्याख्या करना आवश्यक हो गया । धर्म वास्तव में गुणों की धारणा का नाम है जीवन में पवित्रता, प्रेम, शांति , धारण करना यही धर्म है। जहां पवित्रता, स्वच्छता है वहां सब देवी गुण अर्थात निर्भयता, संतुष्टता, उदारता  सहनशीलता व अन्य गुण स्वत आ जाते हैं ।जिससे  सारा वातावरण में शांति निर्भयता  का निर्मित हो जाता है । यह विचार  इंदौर से पधारे धार्मिक प्रभाग के मुख्य वक्ता ब्रह्मा कुमार नारायण भाई ने महात्मा गांधी मार्ग पर  स्थित ब्रह्माकुमारी सभागृह में  भयमुक्त वातावरण  बनाने में धर्म की भूमिका  विषय पर आयोजित धर्म  सम्मेलन में  ऑनलाइन नगर वासियों को संबोधित करते हुए बताया।

इस विषय पर संस्था  की सेवा केंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी माधुरी ने कहा  की करोना काल में सभी के अंदर भय ,डर व्याप्त हो गया। वास्तव में भय करोना से नहीं बल्कि अंदर   पाप कर्मों से मन भयभीत हो रहा है जिसे श्रेष्ठ कर्मों की तलवार से ही काट सकते हैं ।वह श्रेष्ठ कर्महै हर कर्म में ईश्वर की याद को बनाए रखना है ।इस अवसर पर संस्था मुख्यालय माउंट आबू से  ऑनलाइन संबोधित करते हुए धार्मिक प्रभाग के मुख्यालय संयोजक ब्रह्माकुमार रामनाथ भाई ने बताया कि किसी भी प्रकार की आध्यात्मिक अनुभूति ध्यान व योग के अभ्यास से ही होती है।   कोई भी साधारण वृत्ति का व्यक्ति यदि ध्यान व योग का अभ्यास करे तो उसके ज्ञान का तीसरा नेत्र खुल जाता है व वह स्वयं ज्ञान स्वरूप बन जाता है । ऐसे व्यक्ति की सोच दिव्य व सर्व के प्रति कल्याणकारी हो जाती है, तभी वह अपनी सत्य अनुभूतियों को समाजकल्याण हेतु प्रयोग करता है। सत्यता के अनुभव को वह किसी भी प्रकार से लोगों तक पहुँचा सकता है जैसे ग्रंथ, उपन्यास, कथा, कहानी या भाषण इत्यादि द्वारा। परंतु इस आध्यात्मिक ज्ञान को सभी लोग एक सा स्वीकार करें यह सम्भव नहीं क्योंकि वह सब अपने अपने स्वभाव संस्कार के वश में हैं, अतः एक ही दिन में मनुष्य की सोच आध्यात्मिक हो जाए यह असम्भव है।

आज कल  बहुत से धार्मिक, ग्रंथ, कथा, कहानी, प्रवचन, अनुषठान आदि करने पर भी लोगों को आध्यात्मिक तथ्यों पर विश्वास व उनकी धारणा नहीं होती। इसके दो मुख्य कारण हैं… वह धर्म को अलग व वास्तविक जीवन को अलग मानते हैं अतः धर्म व आध्यात्मिक कार्य या तो करते ही नहीं और यदि करते हैं तो केवल नाम मात्र, उनकी प्रैक्टिस आज कल के समय में उन्हें असम्भव सी महसूस होती है। दूसरा प्रमुख कारण है ध्यान व योग के अभ्यास की कमी। ज्ञान मार्ग का राही यदि रोज़ ज्ञान सुनता भी हो लेकिन ध्यान व योग अभ्यास नहीं करता तो उसको आध्यात्मिक ज्ञान को स्वीकार करना व उसमें रूचि आना कठिन है।

यदि वह ध्यान व योग का अभ्यास प्रतिदिन करे तो उसको वही सत्य अनुभव होगा जो गुरू व किसी भी धर्म संस्थापक ने ग्रंथ या कथा रचते समय किया था।

ध्यान व योग ( आत्मिक स्थिति ) एकाग्रता को बढ़ाता है, साथ ही साथ परमात्मा की शक्ति द्वारा आत्मा पर जमी विकर्मों की मैल दग्ध होती है जिससे आत्मा का शुद्ध व ज्ञान स्वरूप जागृत होने लगता है। हर आत्मा वास्तव में शुद्ध व ज्ञान स्वरूप है परंतु हमें आत्मिक स्थिति में स्थित होने का अभ्यास करना होगा जो कि ध्यान व योग से ही सम्भव है। गायत्री परिवार से संतोष जी ने कहा जो खुशी में बाधा डाले वह भय है ।जहां सत्य का प्रकाश है वहां झूठ और डर का अंधियारा रह नहीं सकता ।झूठ चोरी अपराध से भय पैदा होता है। अध्यात्म उसका समाधान करता है अध्यात्म अर्थात स्वयं को जानना में कौन, कहां से आया, कहां मुझे जाना है ।मध्य प्रदेश महिला इकाई की अध्यक्ष व महिला ब्राह्मण समाज की अध्यक्षा पूर्णिमा ने कहा भय से मुक्त होना है तो सदा औरों को सुख देते रहो ।अच्छा कर्म करते रहो। बुरे कर्म जैसे किसी को ठेस पहुंचाना, दुख देना ,ईर्ष्या करना छल कपट से भय पैदा होता है ।जैसा करेंगे वैसा भरेंगे ।जिसके कर्म अच्छे हैं उसके लिए धर्म की कोई सार्थकता नहीं। राजपूत समाज से भेरू सिंह जी चौहान ने कहा कि अंतर्मन में प्रेम, शांति, खुशी का अनुभव करना ही धर्म है ।धर्म का प्रचार प्रसार करते रहने के बाद भी जीवन मेंडर है अर्थात धर्म को जीवन में नहीं उतारा है ।जैन समाज से अनिल जैन ने कहा कि सकारात्मक विचारों से ही जीवन भय मुक्त जी सकते हैं। धर्म का आधार है अहिंसा, सत्य, संयम अनुशासन। इसी के आधार पर चलने वाला निर्भय हो सकता है। कार्यक्रम के अंत में ब्रह्मा कुमार अर्जुन भाई ने सबका मालिक एक है फिर बटा हुआ क्यों संसार है इस लाइन पर बहुत सुंदर गीत की प्रस्तुति दी।