Raipur Brahma Kumaris Pay Tribute to “Mama” First Administrative Head of Brahma Kumaris

Raipur ( Chhattisgarh ): The Brahma Kumaris of Raipur observed the 55th Death Anniversary of Mateshwari Jagadamba Saraswati, First Chief Administrator of the Brahma Kumaris.  Special programs were held at all service centers on this occasion.  The main program was held at the centers of Chaubey Colony and Shanti Sarovar.

BK Kamla, Incharge of the Brahma Kumaris in the area, talked about the personality of Mateshwari Jagadamba Saraswati in the morning program.  A special food offering ceremony, called a Bhog ceremony, was done for the Supreme Soul.  After that vibrations of world peace were generated through the power of silence and Rajyoga.

Mateshwari Jagadamba Saraswati dedicated herself completely to the service of humanity at the tender age of 18 years. Her intense devotion to the Supreme Soul, serving others, and penance made her progress rapidly on the Divine path. She rose to become the first Chief Administrator of the Brahma Kumaris. She was the epitome of motherly love and care for all. Hence, she was addressed as ‘Mother’ by everyone.  She nurtured the Organization since its inception with farsightedness and devotion.  She left her mortal coil on 24th June 1965. This day is observed as ‘Mama’s Day.’

The Brahma Kumaris Organization has since developed into a world organization, having its branches in 140 countries of the world.

ब्रह्माकुमारी संस्थान की प्रथम मुख्य प्रशासिका
मातेश्वरी जी की 55 वीं पुण्यतिथि आज 24 को

रायपुर : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका ब्रह्माकुमारी ओमराधे की 55 वीं पुण्यतिथि पर सोमवार 24 जून को इस संस्थान के सभी सेवाकेन्द्रों में विशेष आयोजन किया गया है।

राजधानी रायपुर में मुख्य आयोजन इस संस्थान के चौबे कालोनी और शान्ति सरोवर स्थित सेवाकेन्द्रों में किया गया। इस दिन प्रात:कालीन सभा में क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी कमला दीदी मातेश्वरी जी के व्यक्तित्व से सम्बन्धित संस्मरण सुनाया। पश्चात परमपिता परमात्मा को भोग लगाने के बाद दोपहर 12 बजे तक ब्रह्माकुमारी संस्थान के सदस्य मौन रहकर राजयोग साधना के द्वारा विश्व में शान्ति के प्रकम्पन फैलाएं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ब्रह्माकुमारी ओमराधे ने मात्र 18 वर्ष की उम्र में ही मानव मात्र के कल्याण हेतु अपना समूचा जीवन ब्रह्माकुमारी संस्थान में समर्पित कर दिया था। सेवा की लगन, ईश्वर के प्रति समर्पण और योग तपस्या में गहन रूचि होने के परिणामस्वरूप वह न सिर्फ पुरूषार्थ में ही अग्रणी रहीं अपितु ब्रह्माकुमारी संगठन की प्रथम मुख्य प्रशासिका बनने का सौभाग्य भी उन्हें मिला।

वह वात्सल्य और ममता की प्रतिमुर्ति थीं। इसीलिए छोटे-बड़े सभी उन्हें माँ कहकर पुकारते थे। वर्ष 1936 में उनके द्वारा रोपित ब्रह्माकुमारी संगठन का पौधा आज पल्लवित होकर दुनिया के पाँचों महाद्वीपों में स्थित एक सौ उन्तालीस (139) देशों में आठ हजार से भी अधिक सेवाकेन्द्रों के माध्यम से लोगों को मानसिक शान्ति और आध्यात्मिक सुख प्रदान कर रहा है। ब्रह्माकुमारी ओमराधे ने 24 जून 1965 को सम्पूर्ण स्वरूप को प्राप्त करने के उपरान्त अपने नश्वर शरीर का त्याग किया था।

गौरतलब है कि आज इस आध्यात्मिक संगठन ने सारे संसार में अपनी एक अलग ही पहचान बनायी है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसे अशासकीय संस्थान के रूप में अपनी सदस्यता प्रदान करने के साथ ही युनिसेफ (UNICEF) और आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC) का सलाहकार सदस्य बनाया है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा कोस्टारिका में संचालित पीस युनिवर्सिटी (Peace University) में भी यह संस्थान सहयोगी है।