Positive Thinking Lecture at Brahma Kumaris Center

Kurseong (West Bengal): During a lecture on Positive Thinking at Kurseong (West Bengal), BK Bhagwan said that there are two types of thoughts, one positive and the other negative.  If one wants to lead a happy life then it is important for him to think only positive thoughts. They should be clean, clear, optimistic and altruistic.

BK Navinta gave some detailed information on Rajayoga. She said that Rajayoga means to be healthy in mind and body. We are in dire need of happiness in our daily life, so instead of searching inside ourselves we are looking outside in all materialistic things or people.

Rachana Rai (Reporter and Journalist of Himachal Darpan) said that to be in stress all the time is quite hazardous for our well being. Becoming free from stress should be the prime motive of everyone’s life.

Even Padma Pradhan, Principal, addressed the occasion.  BK Redurga introduced and shared the activities of the Brahma Kumaris.

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कुर्सियांग(पश्चिम बंगाल )जीवन में दो प्रकार के चिंतन होता  हैं सकारात्मक और नकारात्मकइनमें से मनुष्य को केवल सकारात्मक चिंतन करने की आवश्यकता होती है तथा इसी से मनुष्य खुशहाल जीवन जी सकता है।उक्त उदगार माउंट आबू के इस अवसर पर बी के भगवान् भाई ने कहा कि  वे स्थानीय ब्रह्माकुमारी सेवाकेंद्र पर तनाव मुक्ति के लिए सकारात्मक चिन्तन विषय पर बोल रहे थे

उन्होंने कहा कि हमारे विचार शुद्धस्पष्टआशावादी और परोपकारी होने चाहिए तथा यही जीवन का मूलमंत्र है। इस अवसर पर बहन नवीना ने राजयोग के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि राजयोग का मतलब शारीरिक तथा मानसिक रूप से स्वस्थ रहना है। उन्होंने कहा कि जीवन का लक्ष्य आत्मा को परमपिता परमात्मा से जोडऩा है। लेकिन आज हमारे अंदर शांतिसहनशीलता तथा भाईचारे की भावना बिल्कुल नहीं है। आज हम खुशी को घर से बाहर ढूंढने का प्रयास करते हैं जो सही नहीं है। इसलिए हमें सबसे पहले अपने अंदर झांककर अपने आप को जानना चाहिए।

हिमाचल दर्पण सवादाता (पत्रकार) श्रीमती रचना राय जी ने बताया कि निरन्तर तनावग्रस्त बने रहना जीवन में हानिकारक है। चूँकि जीवन-उद्देश्य आपके सामने है,तनावग्रस्त से दूर रहना ही आपके लिए श्रेष्ठतर होगा। अतः आप तनाव के बहुत से कारणों से बचें रहो जो आप आसानी से कर सकते हैं उतना ही कर लो। श्रीमती पद्ममा प्रधान– प्रिंसिपल ने भी उद्बोधन किया । बी के रीदुर्गा  बहन ब्रह्माकुमारी सस्था का परिचय दिया ।