Organic Yogic Farming Demonstrated to Farmers at Tapovan

Abu Road ( Rajasthan ):  A day-long training program for farmers was held in Tapovan by the Brahma Kumaris. On this occasion, BK Sarla, Chairperson of the Rural Development Wing, stressed the importance of organic yogic farming to get rid of pesticide dependence. The increasing levels of pesticides are harming the soil health as well as getting into the food chain to cause diseases. It is the urgent need of the hour to break this link.

She urged the farmers to take up organic and yogic farming as it will increase their yield and also produce pure food for all. The Rural Development wing of Brahma Kumaris is making dedicated efforts in this direction.

BK Bharat, Director of Tapovan, shared that the results from the practice of yogic farming at Tapovan have been very encouraging. It has increased the soil fertility many folds. Instead of depending upon harmful chemicals, traditional organic methods of pest control can be used.

BK Sumanth and BK Sashikant from Mount Abu thanked everyone for attending this informative training session.

News in Hindi:

जैविक यौगिक खेती पर किसानों को दिया प्रशिक्षण

आबूरोड : ब्रह्माकुमारीज़ संस्था के तपोवन में किसानों के लिए एक दिवसीय
जैविक जैविक यौगिक खेती पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में ग्राम विकास प्रभाग की अध्यक्षा बी.के.  सरला ने कहा की
यदि किसान चाहे तो वह जैविक और यौगिक खेती कर रसायनों से बच सकता है।
क्योकि रसायन मानव जाती को हानि पहुंचा रहे है। यदि समय रहते हमने इस पर
अंकुश नहीं लगाया तो आने वाले समय में हर व्यक्ति मरीज होगा। उन्होंने
किसानों से आग्रह किया की यदि किसान चाहे तो वह अपनी पैदावार को
दोगुना बढ़ा सकते है। इससे एक तो शुद्ध अनाज मिलेगा और दूसरा अच्छी
पैदावार भी होगी। ब्रह्माकुमारीज़
संस्थान का ग्रामविकास प्रभाग लगातार इसके लिए प्रयासरत है। तपोवन के
निर्देशक बी.के. भरत ने कहा की जैविक यौगिक खेती का जब से तपोवन में
प्रयोग हो रहा है इसके चौकाने वाले परिणाम आए है। इससे जहा भूमि की रक्षा
की जा रही है वही भूमि की उर्वराशक्ति भी बढ़ रही है। इसलिये किसानों को
ज्यादा से ज्यादा जैविक यौगिक खेती का प्रयोग करना चाहिए। जीवामृत और
कीटनाशक दवाओंकी जगह परंपरागत चींजो के उपयोग से खेती करने की सलाह दी।