Online Webinar by Brahma Kumaris Indore on Universal Brotherhood Day

Indore ( Madhya Pradesh ): 25th August is celebrated every year by the Brahma Kumaris as Universal Brotherhood Day in memory of Prakash Mani Dadiji’s Ascension. This year is the 13th year of her leaving her mortal coil. In this connection, a webinar was conducted by the Brahma Kumaris of Indore Om Shanti Bhawan.

About Prakash Mani Dadiji, BK Santosh, from Mumbai, the Zonal Director of Maharashtra, said, “Dadi Prakash Mani had wonderful Leadership skills. Overwhelmed with the feeling of Welfare of the World, treating herself as a Trustee, whatever directions she used to give were accepted heartily by all. She was far far away from the “I and Mine” feelings. Her belief was if you think “I am the Head, then only comes the Headache.” That’s why considering herself as Trustee and God Father, Supreme Soul as the Doer, she advanced the Godly Services.”

BK Manorama from Prayagraj, Uttar Pradesh, narrating about Dadiji, said, Dadiji was the embodiment of Divinity. Her Nature of Charity used to make everyone also Charitable. Her Mind was so full of Mercy, Compassion, and Kindness that, whenever in society or in the country any disaster took place — be it scarcity of food for animals, scarcity of water in summer, a grave situation due to floods, an earthquake in Gujarat — on every occasion Dadiji’s heart used to melt away and at her instance, a Medical Team from Mount Abu Head Quarters, with all necessary items of Rescue and First Aid, rushed to the spots to help. Remembering the instance of a flood in Odisha, she said that surrendered residents of the Head Quarters delivered all the needed items — from clothes to beds for sleeping, etc, including their own important items — to the affected people. She said that during her tenure, the Organization was recognized worldwide and granted the Status of NGO by the United Nations. She planned and implemented so many International Projects for the Welfare of Mankind.

On this occasion Sri 108 Swamy Sacchidananda of Omkareshwar said that with true Love of Heart we can win the Heart of God. Only with Love, Compassion and Goodwill can Universal Brotherhood be established.

Mr. Gurmeet Singh Narang, the Global Happiness Leader, said that as the Earth is one for all of Mankind, as Water is common for all, Sky is one, Air is one and Sun gives Light commonly to all, in the same way God Father is also One for all, who has been accepted by all religious souls. Hence going beyond the sense of body, caste and religion, when we as a Soul develop a relationship with God, the Supreme Father, One World Family and Universal Brotherhood will be created.

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दादी जी मै और मेरे पन से कोसों दूर थी
दादी जी देवत्व की मर्मस्पर्शी मूर्ति थी

इंदौर: दादी प्रकाशमणी जी में अद्भूत नेतृत्व कला थी वे विश्व कल्याण की भावना से ओत प्रोत होकर, स्वयं को निमित्त समझकर प्यार से जो आदेश देती थी हरेक दिल से उसको स्वीकार करता था। दादी जी मै और मेरेपन से कोसों दूर थी उनकी मान्यता थी कि खुद को हेड समझने से ही हेडेक होता है इसलिए स्वयं को करनहार, परमपिता परमात्मा को करावनहार समझकर ईश्वरीय सेवाओं को आगे बढाया। उक्त संस्मरण कल ( 25 अगस्त ) ब्रह्माकुमारी संस्थान की मुख्य प्रशासकिा रही राजयोगिनी दादी प्रकाशमणी की 13 वीं पुण्य स्मृति दिवस पर आयोजित ऑनलाइन वेबिनार  “ पारस्पारिक सद्भाव से विश्व बंधुत्व” के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज महाराष्ट्र जोन की निदेशिका संतोष दीदी मुम्बई ने उच्चारे।
दादी जी देवत्व की मर्मस्पर्शी मूर्ति थी उनका दातापन का भाव हरेक को दाता बना देता था । दादी के मन में दया, करुणा, उदारता इस कदर था कि समाज में देश में जब भी विपदा आई चाहे पशुओं के चारे की समस्या, चाहे गर्मियों में पानी की कमी हुई हो या कहीं बाढ की स्थिति हो चाहे गुजरात में आये भूकम्प स्थिति हो दादी  का मन पसीज जाता था और आबू संस्था के मख्यालय से मेडिकल टीम राहत सामग्री आदि की व्यवस्था का तत्काल रवाना करती थी, प्रयागराज उत्तर प्रदेश की ब्रह्माकुमारी मनोरमा दीदी ने उच्चारे। आपने उडीसा में आये बाढ के प्रसंग की स्मृति दिलाते हुए कहा की उस समय ब्रह्माकुमारीज के मुख्यालय में समर्पित सभी भाई बहनों ने कपड़े व बिस्तर से लेकर अन्य सभी आवश्यकता की वस्तुयें, अपने स्वयं की आवश्यकता की चीजें दे दिया बाढ़ पीडितों के लिये ।  उनके कार्यकाल में ही संस्था विश्व स्तर पर ख्याति प्राप्त कर संयुक्त राष्ट्र में अशासकीय संगठन की परामर्शदाता की सदस्यता प्राप्त की। कई विश्व सेवा की योजनायंे बनाकर उन्हें क्रियान्वय किया।

इस अवसर पर ओंकारेश्वर के श्री 108 स्वामी सच्चिदानंद गिरी महाराज ने कहा कि हम सच्चे दिल के प्रेम से भगवान के दिल को भी जीत सकते हैं प्रेम, करुणा, सद्भाव से विश्व बंधुत्व की स्थापना होगी ।

ग्लोबल हैपीनेस लीडर डाॅ. गुरुमीत सिंह नारंग ने कहा कि जिस प्रकार सर्व मानव मात्र के लिए धरती एक है, जल सभी के लिये एक जैसा है, गगन एक है , हवायें एक समान है सुर्य सभी के लिए एक समान प्रकाश देता है उसी प्रकार हम सबका ईश्वर पिता भी एक है जिसे सभी धर्म की आत्माओं ने स्वीकारा है अतः देह के, जाति के धर्म से उपर उठकर आत्म स्वरुप में स्थित हो परमात्मा पिता से संबंध जोडने से ही विश्व बंधुत्व वसुधैव कुटुम्ब की स्थापना होगी।