“Khushiyon Ka Big Bazar”- A Three-Day Workshop in Nagpur

Nagpur (Maharashtra): “Khushiyon Ka Big Bazar”(Big Bazar of Happiness), a three-day workshop, was organised by the Brahma Kumaris at Vishwa Shanti Sarovar, Jamtha. Director of All India Radio, Nagpur, Mr. Chindwane was the chief guest at the event.

On the occasion, the Joint Director of the Brahma Kumaris in Nagpur, BK Manisha, stated that the workshop “Khushiyon Ka Big Bazar” has commenced in the city and is sure to bring happiness, peace and smiles on the faces of the people.

The three-day workshop was conducted by BK Shaktiraj Singh. While addressing the audience, he said that Big Bazaar Mall is a trustworthy brand name in the city. The mall has various products and materialistic things, but the mall does not have happiness and pleasure to sell to their customers.  He further added that people have started thinking that the materialistic things they buy is what they get happiness from, that these materialistic things are the basis of their life. While in reality happiness is present inside the person and not in the outside world.

He explained the concept of happiness through a famous song of legendary actor Raj Kapoor’s “Jeena Isi ka Naam Hai”. He added that around 80% of diseases are caused due to the negative thoughts of a person. A person should also have a positive conversation and thoughts, and that will help him/her to treat the diseases efficiently and can live a disease-free and stress-free life.

Various exercises were also conducted by BK Shakiraj Singh. CRAFT, a technique where C stands for Cancel, R stands for Reject, A stands for Affirmation and T stands for Training was explained by BK Shakiraj Sigh to tune the minds of the people.

The proceedings of the event were conducted by BK Raksha, and a vote of thanks was proposed by BK Premprakash.

In Hindi:

खुशी का बिग बाजार – तीन दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन ”

ब्रह्माकुमारीज के आयोजित “खुशियों का बिग बाजार” इस तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ शुक्रवार दिनांक २२ को दिप प्रज्वलन के साथ हुआ। प्रमुख अतिथि के रूप में भ्राता श्री चिवंड़े जी, आकाशवाणी स्टेशन डायरेक्टर उपस्थित थे।

ब्रह्माकुमारीज नागपुर की सहसंचालिका मनीषा दीदी ने स्वागतीय बोल में कहाँ की जैसे बिग बाजार में छोटे से छोटी चीज भी मिलती है तो बड़े से बड़ी चीज भी मिलती है। हम उन्हें कुछ आवश्यकता वश ओर कुछ आकर्षणवश खरिदते है। लेकिन कही पर भी आतंरिक खुशी मिलने का स्टॉल नहीं होता। यहाँ पर विश्व शांति सरोवर में खुशी का बिग बाजार शुरु हो रहा है। पुरे 3 तीन दिन के लिए सभी को इसका लाभ लेने की लिए कहाँ। कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी ने खड़े होकर राष्ट्रिय गीत के साथ पुलवामा में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यशाला के वक्ता भ्राता बी के शक्तिराज सिंह ने कहा की कैसे अपने भारतीय सैनिक हिमालय की चोटी से लेकर भारत के चारो तरफ, विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए अपने प्राणों का बलिदान देकर भी भारत माँ की रक्षा करते है। उनके प्रति हम अपनी भावनायें अर्पण करते है। । आगे उन्होंने कहा बिग बाजार, जहाँ हर तरह की वस्तु मिल जाती है लेकिन कहीं पर भी खुशी का स्टॉल नहीं लगा रहता। खुशी कहाँ मिलेगी ? इस प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहाँ , क्या खुशी बिग बाजार में चीजे खरीदने से मिलती है या बड़ी बड़ी आधुनिक वस्तुयें चीजे अपने पास रखने में मिलती है ? बी.के. शक्तिराज भाई ने कहाँ खुशी हमारे भीतर है। चीजे हमारी सुविधा के लिए है लेकिन हमने उसेही खुशी का आधार मान लिया। इस दौड़ में स्पर्धा करते प्रॉब्लम, दुःख की शुरवात होती है। प्रॉब्लम , दुःख हमारे अंदर है लेकिन हम उसके समाधान के लिए बाहर ढूंढने निकलते है। इसीलिए हमे भीतर जाना चाहिए और जो भीतर जाता है वो तर जाता है। । आगे उन्होंने कहाँ, क्या मुस्कुराते हुए कोई नेगेटिव सोच सकता है, दुःख की बात याद आ सकती है? जैसे टि.व्ही. में एक समय पर एक ही चैनल चलता है वैसेही हमारे मन की टि.व्ही. पर हैप्पीनेस का चैनल चाहते है पर बार बार हम दुःख का , निराशा का , बीती हुई बातों का चॅनेल चालू कर देते है। जैसे शरीर के लिए शरीर डॉक्टर चाहिए वैसे ही मन के लिए मन का डॉक्टर चाहिए। । आगे उन्होंने एक छोटीसी एक्सरसाइज कराई और सभी को मुस्कुराते हुए नेगेटिव थॉट सोचने के लिए कहाँ और कहाँ जैसे हम किसीको नेगेटिव दे और उम्मीद करे की हमे पॉजिटिव मिले यह असंभव है।

आज सभी की यही हालत हो गयी है हम अपने खुशी पासवर्ड भूल गए है। बच्चो के मुस्कुराते हुए all is well गाने का एनीमेशन दिखते हुए उन्होंने अनेक बातों को हाईलाइट किया जैसे छोटे बच्चे बहुत सारी ज्ञान से से अनभिज्ञ होते है पर अपनी कल्पनाशक्ति और मानस दर्शन के आधार पर वो हमेशा खुश रहते है। वास्तविक तौर पर हमारे जीवन में खुशी कैसे आती है। यह उन्होंने राज कपूर जी फिल्म जीना इसी का नाम है के गाने पर समझाया।

मन को प्रशिक्षीत (Craft technique) करने के बारे मे C for Cancel, R for Reply, A for Affirmation, F for Focus, T for Training, इसको को कैसे यूज करे ताकि जीवन में खुशी आये ? हम जिस चीज को देखते है, सोचते है वो हमारे जीवन में आने लगती है तो फोकस करेंगे खुशी के बारे में। । ज्यादातर लोग हमेशा वही सोचते है की, उनकी जीवन में ऐसा नहीं होना चाहिए इसलिए जीवन में संतुष्ट नहीं है। वही बोल बोलते है मै दुखी नहीं होना चाहता हु, मनुष्य का अंतरमन नहीं की भाषा नहीं समझता, इस पर और अधिक विस्तार से समझाते हुए अल्लाहदीन हमारा अंतर्मन, जिन्न के समान है उसे बस “जो हुकुम मेरे आका” पता है और वो हुकुम को पूरी कर देता है। हम जो भी सोचते है वो हमारा बाह्य मन है जिसमे सिर्फ १०% शक्ति रहती है और जिन्न हमारा अंतर्मन है जिसमे ६०%: शक्ति होती है लेकिन हमे यूज करना नहीं आता है। बाह्य मन अल्लाहदीन है और अंतरमन जिन्न है।

अंतर्मन कहता है की आपको जीवन जो चाहिए वो पा सकते है लेकिन उसको आज्ञा देनी पड़ती है और यह बाह्य मन यानि जागृत मन को देनी पड़ती है। चवूमत कहा है? वूमत जीवनहीज में है, ८०% बीमारिया मन से निगेटिव command देने से होती है। सकारात्मक विचार बाह्य मन के द्वारा कैसे देनी चाहिए इसकी सरल विधि तथास्तु शब्द के प्रयोग करके सिखाई। आगे उन्होंने कहाँ , प्रॉब्लम तब होती है जब हम उसे बात को अंतर्मन से स्वीकार करते है। जब हम किसी की बात को सुनकर अपनी प्रोग्रामिंग करते है तब प्रॉब्लम होती।।

आज के किशोर उम्र के छात्रोंको कितनी ही निगेटिव इन्द्वक्शस से गुजरना पड़ता है, की तु बुध्दु है, तु तो गधा हैकृबच्चा सोचता मेरे माँ बाप झुठ थोडेही बोलते होंगे। मैं सचमुच ऐसा हूं। मेरे से कुछ नहीं होगा। ऐसी निगेटिव्ह प्रोग्रामिंग होती जाती। बच्चे का कॉन्फिडन्स कम होता। जाता है। अभिभावक अपने बच्चो को , टीचर्स अपने छात्रोको नेगेटिव बोल बोलके उनका आत्मविश्वास कम कर देते है। मेडिटेशन से मन को पॉजिटिव्ह कमांड देकर नेगेटिव थॉट को कॅन्सल करने की ताकत आती है कॅन्सल शब्द एक शक्ति के रूप में यूज कर सकते है।

विकलांगो पर बने एक विडिओ दिखाते हुए समझाया की इनकी जीवन में भी बड़े बड़े प्रोब्लेम्स है लेकिन इन्होने सकारात्मक शक्ति को अपनाते हुए अपने जीवन में प्रोब्लेम्स का सामना किया और अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बनाया। 85 % बीमारिया साइकोसोमैटिक यानि मन से रिलेटेड होती है।

एक नकारात्मक विचार आपको ओसामा बिन लादेन सकता है और एक सकारात्मक विचार आपको अब्राहम लिंकन, महात्मा गाँधी, दादी जानकी जैसा बना सकता है एक नेगेटिव विचार आपके हृदय पर क्या असर करता यह एक विडिओ दिखार समझाया डॉक्टर हर्बर्ट बेंसोन हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की रिसर्च में सिद्ध कर बताया गया की नेगेटिव विचार से हृदय में ब्लॉकगेस तैयार होते है. लगातार निराशा और दुख के संकल्पो से हमको शारीरिक और मानसिक बीमारिया होती है.

बी.के. शक्तिराज भाई ने कैसे खुशियों का बिग बाजार कार्यक्रम की शुरुवात है उसके बारेमे बताते हुए उन्होंने कहा की उनके जीवन में घटी एक दुर्घटना मृत्यु के समीप ले गई और तब एहसास हुआ की हम अपने साथ क्या लेके जाएंगे, उत्तर मिला सिर्फ दो बैग्स , एक अच्छे कर्मो का और दूसरा बुरे कर्मों का साथ जायेगा और उसी दिन निर्णय किया की अच्छे कर्मों का बैग भारी करना है ।।

आपक एक नकाटेड होती आभार प्रदर्शन बी के प्रेमप्रकाश भाई ने किया और मंच संचालन बी के रक्षा बहन ने किया।