“International Dance Day” Celebrated by Brahma Kumaris, Agra

Agra ( Uttar Pradesh ):  An International Dance Day program was celebrated at the Brahma Kumaris “Prabhu Milan” Idgah center, in Agra. The program was attended by Agra’s known poets, journalists, social workers, musicians, stage artists and others.

The Art and Culture Wing of the Brahma Kumaris and the children of Nrithya Jyothi Kathak Kendra who are proficient in various fine arts performed various dances.

On this occasion the Director of Nrithya Jyothi Kathak Kendra addressed the audience, saying that this dance day is celebrated globally by the Dance Committee of the International Theatre Institute (ITI), the main partner for the performing arts of UNESCO. The date April 29th was chosen as it is the birthday of famed reformer French dance artist Jean-Georges Noverre.

BK Ashwina welcomed the guests saying that dance is a culture, it is a worship to the Divine, and it is a part of Indian culture since ancient times. Classical dance brings love and peace in one’s life and helps one to lead a disciplined life. Spiritual Knowledge and Rajayoga practice helps the dancers to excel in their art.

The programme theme was about the desire of the Martyrs and the vision of Golden Bharat. The Senior dance guru Rajendra Raghuvansi was offered tribute on his birth centenary.

Professor Veena Sharma Kulsachiv of Kendriya Hindi Sansthan, Sr Reporter Brij Khandelwal, Pandit Keshav Talegaonkar, poetess Sruthi Sinha, Dilip Raghuvansi, BK Gopal, and BK Sriram of the Brahma Kumaris were present in the celebration. BK Amar, BK Raj, and Sister BK Ashu coordinated the programme.

News in Hindi:

ब्रह्माकुमारिज़ के कला एवं संस्कृति प्रभाग तथा नृत्य ज्योति कत्थक केंद्र के विविध नृत्य कलाओं में प्रवीण बच्चों ने अंतरारष्ट्रीय नृत्य दिवस की पूर्व संध्या पर प्रभु मिलन केंद्र, ईदगाह, आगरा के सभागार में विविध नृत्य प्रस्तुत किये |

इस अवसर पर नृत्य ज्योति कत्थक केंद्र की निदेशक ज्योति खंडेलवाल ने कहा कि यह दिवस महान रिफॉर्मर जॉन जॉर्ज नावेरे के जन्म की स्मृति में मनाया जाता है | यूनेस्को के अंतरारष्ट्रीय थिएटर इंस्टीट्यूट ने २९ अप्रैल 1982 को प्रतिवर्ष इस दिन को अंतरारष्ट्रीय नृत्य दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की |

अतिथियों का स्वागत करते हुये केंद्र प्रभारी बी.के.अश्विना बहन ने कहा – नृत्य एक साधना है, भगवान् की आराधना है| भारतीय संस्कृति में यह प्राचीन काल से उपस्तिथ है| शास्त्रीय नृत्य व्यक्ति के जीवन में शांति एवं अनुशासन लाता है तथा प्रेम की वृद्धि करता है| आध्यामिक ज्ञान एवं राजयोग का नियमित अभ्यास नृत्यकला के साधकों को प्रवीणता की ओर ले जाता है |

कार्यकर्म की थीम शहीदों की अभिलाषा, स्वर्णिम भारत की आशा रही | कार्यकर्म में नाट्य पितामह राजेन्द्र रघुवंशी को उनके जन्म शताब्दी के अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी| कार्यकर्म में प्रोफेसर वीणा शर्मा कुलसचिव, केंद्रीय हिंदी संस्थान, बृज खंडेलवाल वरिष्ट पत्रकार, पंडित केशव तलेगांवकर, श्रुति सिन्हा कवित्री, दिलीप रघुवंशी, ब्रह्माकुमारिज़ हेड क्वार्टर से पधारे बी.के.गोपाल भाई, बी.के.श्रीराम भाई की सम्मानीय उपस्तिथ रही | बी.के.अमर भाई, बी.के.राज, बी.के.आशु बहिन ने कार्यकर्म की व्यवस्था संभाली |