“Educational System Becomes Effective through Rajayoga” : Online Seminar on Teachers Day

Alirajpur ( Madhya Pradesh ): On Teacher’s Day, the Brahma Kumaris of Alirajpur Centre, Dipaki Square, arranged a Seminar. BK Narayan, the National Coordinator of the Religious Wing from Indore, and Dr. Sitaram, Professor of Government College, were the main speakers.

BK Narayan said, “Students and Teachers both are the Powerful medium to create an Educational Atmosphere. Basic thought is not given in the present Education on the growth of Understanding, Awareness, Inner Powers and Values in man. It is improving the Knowledge and Caliber for Material Life but also creating many discrepancies. The Positive Atmosphere of Education can only make it effective.” He said, “Atmosphere is created by Human Thought Vibrations. By thinking Positively, the Atmosphere becomes interesting and the learning process becomes easy. Students skip their classes because of a dull atmosphere and, due to mental tension, fall prey to bad habits and sometimes get addicted to drugs and alcohol. The solution of this main problem of Education is only possible by Rajayoga. It is proven in this area that by keeping three minutes of silence in Class, the minds of the students become alert on their subject matter.”

He said that Concentration of Mind helps to form a learning atmosphere. While learning to improve attentiveness, by creating positive thoughts, one must also practice traffic control of thoughts in between.  This helps the student to shift his attention away from waste thoughts and positive, pure and necessary thoughts will start flowing and the atmosphere becomes filled with positive vibrations.

Professor Dr. Sitaram said on this occasion that in the ancient Indian Gurukul system of Education, they sit under the trees and the open sky in a natural atmosphere and chant Mantras to create a serene learning condition. Thereby very powerful vibrations were being produced, mental power used to get rectified, and transformation would take place. Instead of punishing, students were taught with love and tolerance, due to which they improved very fast. He said that maintaining three minutes of silence before commencing study in the class to create an atmosphere of interest is very scientific.
News in Hindi:
राजयोग से शिक्षण कार्य प्रभावशाली होता है। शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही शैक्षिक वातावरण को उत्पन्न करने के लिए सशक्त माध्यम*    ब्रह्माकुमार नारायण भाई
अलीराजपुर : वर्तमान समय में प्रदान की जा रही शिक्षा में मनुष्य की समज, चेतना, आंतरिक शक्तियों और मूल्यों का विकास करने की मौलिक सोच का समावेश नहीं है। इसीलिए यह शिक्षा भौतिक जीवन जीने के लिए ज्ञान और दक्षता का विकास तो कर रही है, परंतु इसके साथ ही जीवन में अनेक प्रकार की विसंगतियां पैदा कर रही है। सकारात्मक शैक्षिक वातावरण में ही शिक्षण कार्य प्रभावशाली ढंग से संपन्न होता है। शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही शैक्षिक वातावरण को उत्पन्न करने के लिए सशक्त और चैतन्य माध्यम है। मनुष्य द्वारा उत्पन्न विचार तरंगे वातावरण का निर्माण करती है। सकारात्मक चिंतन करने से शैक्षिक वातावरण रुचिकर बनता है और सीखने की प्रक्रिया सहज होती है ।अरुचिकर शैक्षिक वातावरण के कारण ही विद्यार्थी प्राय अध्ययन से दूर भागते हैं तथा मानसिक दबाव पड़ने पर गलत आदतों का शिकार हो जाते है और कई बार मादक द्रव्यों का सेवन भी करने लगते हैं। यह विचार इंदौर से पधारे धार्मिक प्रभाग के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य ब्रह्मा कुमार नारायण भाई ने दीपाकी चोकीपर स्थित ब्रह्माकुमारी सभागृह में शिक्षक दिवस पर शिक्षक व नगर वासियों को संबोधित करते हुए बताया कि शिक्षा की सबसे बड़ी समस्या का समाधान राजयोग द्वारा संभव है। इस क्षेत्र में किए गए प्रयोग से यह बात प्रमाणित हुई है कि कक्षा में शिक्षण कार्य प्रारंभ करने से पूर्व 3 मिनिट साइलेंस का वातावरण बनाने से शिक्षण कार्य प्रभावशाली हो जाता है। विद्यार्थियों का ध्यान इधर-उधर से हटकर विषय वस्तु की ओर आ जाता है ।मानसिक एकाग्रता शैक्षिक वातावरण का निर्माण करने में सहायक होती है ।मानसिक एकाग्रता बढ़ाने हेतु मन में सकारात्मक संकल्पों को उत्पन्न करने के लिए शिक्षण कार्य करते समय बीच-बीच में संकल्प के ट्रैफिक कंट्रोल की विधि को अपनाने से विद्यार्थी के मन में उत्पन्न होने वाले व्यर्थ संकल्प से ध्यान हट जाता है और केवल पवित्र , आवश्यक, सकारात्मक संकल्प का मन में शक्तिशाली  प्रवाह चालू रहता है इससे सकारात्मक  प्रकंपन उत्पन्न होते जो पूरे वातावरण में फेलते हैं। इस अवसर पर  गवर्नमेंट कॉलेज के  प्रोफेसर  डॉक्टर सीताराम ने बताया कि प्राचीन भारत की गुरुकुल शिक्षा प्रणाली की सफलता का यही रहस्य था ।प्राकृतिक वातावरण में खुले आसमान और वृक्षों के नीचे चलने वाले इन गुरुकुल में शैक्षिक वातावरण बनाने के लिए मंत्रोच्चारण आदि किया जाता था। जिससे शक्तिशाली प्रकंपन उत्पन्न होते थे ।मानसिक शक्तियों का परिष्कार एवं परिवर्तन होता था ।छात्रों को दंड देने के बजाय सहनशीलता, प्रेम से समझा कर शिक्षा देने पर शीघ्र अपने आचरण में सुधार कर लेते थे ।कक्षा में शिक्षण कार्य आरंभ करने से पूर्व 3 मिनट मौन का अभ्यास कक्षा के शैक्षिक वातावरण को रुचिकर बनाने की वैज्ञानिक विधि है। कार्यक्रम में ब्रह्मा कुमारी माधुरी ने सबको राजयोग का अभ्यास भी कराया।