Discourse on Shrimad Bhagwat Gita in Alirajpur

Alirajpur ( Madhya Pradesh ): The Brahma Kumaris of Alirajpur arranged a daily Public Program on the grounds of the Panchmukhi Hanuman Temple for eight days on “Discourse on Srimat Bhagwat Gita,” for which BK Gita from Seoni (MP), exponent in the subject, was invited.

It was commenced with a Rally of a Chariot, in which BK Gita was seated, that went around the City.

After the Rally BK Gita, the Chief Speaker on the Srimat Bhagwat Gita; BK Madhuri, Centre in Charge and Organiser of this Program; BK Narayan from Mount Abu; BK Annapurna and BK Divya from Indore; BK Jayanti from Jhabua; Mr. Suresh Varma, Additional District Collector; Mr. Madan Patel and Mr. Gyarshilal Bhatia lighted the Lamps as a formal opening of the function “Discourse on the Srimat Bhagwat Gita” by BK Gita.

She said, “At present times, the Mahabharata War is going on between Righteousness and the Unrighteousness in each and every one’s life. Each time wrong is winning over the right. Mind always tries to remain Stable and Righteous but even then, it falls in the grip of the Evil. True wisdom of Gita is the only remedy that unfailingly eliminates the Evil. The Critics have filled the Scripture with their own thoughts, due to which Original Truth contained in it have become lost. So presently, God has descended on earth and is revealing true hidden Knowledge again. Thus, by the deep Secrets coming to light, Mind becomes Tranquil and Stable forever. Even today the ill traits of the Kauravas are surviving within us, which we are unaware of.”

To transform those Evil Traits into Righteousness, she narrated a very good example of a Prince, “being unaware of his true identity, mingled with common men and developed all their habits. He never behaved like a Son of the King. His thoughts, speech and actions all became very ordinary because he forgot that he is from Royal Family. But no sooner he was reminded of his Royalty, it took no time to be transformed. In the same way, we too forgot that we are Children of God and hail from the Pure and Divine Deity Dynasty. By passing through the Cycle of Births and Rebirths, by living in the company of vicious people of Kaliyug, we forgot all our Noble Nature. Therefore, It is now the time and necessary to know our true identity.”

She further said, “When we go to see a dead person, his body is there but those around say that so-and-so has left. Then who was he with whom we used to talk? Was he this Body, made of 5 Elements, lying before us? or he, the Soul, that left the Body?” The way she explained made the people realise very well that we are the Soul but not the Body.

She explained in a very interesting and easy way the meaning of our practices, that burning a wick in an earthen lamp, applying a tilak in between the eyebrows, placing a burning lamp or a coconut on a Kalash, etc., are nothing but to make us aware that we are the Soul, Children of the Supreme Soul.

In Hindi:

महाभारत के युद्ध में किया शिव शक्ति गीता ने शंखनाद, होगा समस्याओं का नाश—– अलीराजपुर, 8 जनवरी -वर्तमान समय हर एक के जीवन में धर्म, अधर्म की महाभारत छिड़ी हुई है ।बार-बार अधर्म विजई बनता जा रहा है ।मन बार-बार धर्म की राह पर टिकने की कोशिश करता फिर भी बुराइयों के वस हो जाता है ।इसका संपूर्ण सफाया की रामबाण औषधि है सत्य गीता ज्ञान । वर्तमान गीता में टीका कारों ने अपने-अपने भाव के अनुसार गीता शास्त्र बना दिया जिससे उसमें छिपा सत्य ज्ञान लुप्त हो गया । वही छिपा हुआ ज्ञान पुनः परमात्मा इस सृष्टि पर आकर वर्तमान समय दे रहे हैं और इसके छिपे गूढ़ रहस्यों के उजागर होने से मन सदा सदा के लिए स्थिर एकरस, अचल हो जाता है। यह वाक्य शिवनी से पधारी बाल ब्रह्मचारी गीता दीदी ने हनुमान मंदिर के सामने की गार्डन में आयोजित विशाल सभा में श्रीमद्भागवत गीता के प्रथम दिन के अवसर पर कही। इस कथा के शुभारंभ से पूर्व माउंट आबू से पधारे ब्रह्माकुमार नारायण भाई ,, इंदौर से पधारी ब्रम्हाकुमारी अन्नपूर्णा, दिव्या बहन ,झाबुआ से पधारी ब्रम्हाकुमारी जयंती, कार्यक्रम संचालिका ब्रम्हाकुमारी माधुरी बहन व गीताबेन अतिरिक्त ज़िलाधीश सुरेश वर्मा, मदन परवाल, ग्यारशीलाल भाटिया ने दीप प्रज्वलन कर के कार्यक्रम का शुभारंभ किया ।इससे पूर्व शहर में गीता भागवत शोभायात्रा का शुभारंभ पंचमुखी हनुमान मंदिर से माउंट आबू से पधारे ब्रम्हाकुमार नारायण भाई ने शिवबाबा का ध्वज दिखाकर किया ।शहर के अलग-अलग स्थानों पर गीता दीदी का फूल मालाओं से स्वागत किया गया। गीता दीदी रथ पर विराजमान होकर धनुर्धारी अर्जुन के समान ऐसा लग रही थी जैसे महाभारत में। उसकी योग शक्ति का प्रभाव इतना चमत्कारिक था कि उसके दर्शन मात्र से दर्शनार्थियों के अनेक जन्मों के पापों का नाश हो रहा है, मन को असीम उर्जा शांति का अनुभव करने को मिला ।शोभा यात्रा की समाप्ति के बाद आज कथा के प्रथम दिन के अवसर पर गीता दीदी ने बताया की अपने अंदर अब तक भी कई ऐसे कौरव के समान संस्कार हैं जिससे हम अनभिज्ञ थे, लेकिन आज इन कौरवी संस्कारों को कैसे बदला जाए उसका सटीक उदाहरण दिया कि जिस प्रकार यदि राजा का बेटा जब यह भूल जाता है कि मैं राजकुमार हूं और साधारण लोगों के साथ रहते-रहते स्वयं के बोल कर्म और आदतों को साधारण बना लेता है। इसी तरह हम यह भूल गए हैं कि हम परमात्मा की संतान हम एक दिव्य पवित्र देव कुल की आत्मा है, और जन्म मरण में आते-आते कलयुगी लोगों के साथ रहते-रहते देवी देवताओं के संस्कार भूल गए, लेकिन जैसे ही राजकुमार को याद दिलाया जाए कि आप राजा की संतान हो, राजा के बेटे राजकुमार हो तो उसे स्वयं को बदलने में समय नहीं लगता ,तो स्वयं को स्वयं की वास्तविकता का बोध कराने की आवश्यकता है। फिर आगे दीदी ने बताया जैसे हम किसी की मृत्यु में जाते हैं तो देखते हैं, कि शरीर वही रहता है लेकिन सभी कहते हैं फलाना चला गया तो वह जिससे हम बात करते थे, वह कौन जो वहीं पर विद्वान पंचतत्व की देह है वो? या फिर जो चली गई वो ?आत्मा और यह बहुत अच्छी तरह से जन मानस में बैठ गया कि हम शरीर नहीं हम आत्मा है ,इसी आत्म तत्व का बोध कराने के लिए अब तक हम जो कुछ कर्मकांड करते आए हैं। जैसे मिट्टी के दीए में ज्योति जलाना, भ्रकुटी के मध्य तिलक लगाना, कलश के ऊपर ज्योति जलाना ,कलश पर नारियल रखना, इन सब का आध्यात्मिक रहस्य बहुत ही रमणीक ढंग से एवं सरल भाषा में लोगों को बता कर आत्म तत्व तक पहुंचाया।यह कथा प्रतिदिन दोपहर 2 से5बजे तक आयोजित की जा रहीं हैं।