Conference cum Rajayoga Retreat on “Artists – Towards a Peaceful and Blissful Life”

Mount Abu ( Rajasthan ): The Art and Culture Wing of the Rajayoga Education and Research Foundation of the Brahma Kumaris organized a pan India program for artists in Harmony Hall at Gyansarovar in Mount Abu.

The topic was “Artists – Towards a Peaceful and Blissful Life“. Thousands of artists from all over the country took part in it. The program was started with a lamp lighting ceremony.

Mr. Rajeev Jain, Additional Director of the Information and BroadCasting Ministry, Delhi, was the chief guest. In his remarks, the chief guest said that he has known about the Brahma Kumaris for a long time, but has had the good fortune of visiting only now. The positivity one receives here is remarkable. It sustains a person for a long time. Meditation is also an art which helps us navigate life successfully.

BK Kusum, National Co-ordinator of the Art and Culture Wing, welcomed everyone and said that the key to a happy and blissful life is in being a true artist of Rajayoga which helps us to connect with the Supreme Soul.

BK Niha, Mumbai regional coordinator of the Art and Culture Wing, delivered the keynote speech and said that to be a divine artist, we must shine from within, which is possible only when we realize the soul conscious nature of our being.

BK Karuna, Chairperson of the Media wing, in his remarks talked about the significance of the place of Madhuban, Headquarters of the Brahma Kumaris, which is considered as heaven on earth. It gives peace and happiness to all who come here.

Ms. Jyoti Khandelwal, Director Nrityajyoti Kathak Kendra from Agra, was the guest of honour. While expressing her gratitude she said that spirituality is the diet for the soul.

BK Mruthyunjyaya, Vice chairperson of the Education wing, highlighted the importance of artists in society. If they become divine, with their impact others will follow suit. BK Tripti guided everyone in experiencing Rajyoga meditation.

Mrs. Aruna Sangal and Ms. Pratima Kannan, popular film and TV actresses, were the guests of honor. They expressed their gratitude and said that the visit has inspired them to explore the spiritual path.

BK Satish, Headquarters co-ordinator of the Art and Culture wing, welcomed everyone on behalf of the organization.

News in Hindi:

ब्रह्माकुमारीज़ में सकारात्मकता प्राप्त होती रहती है : अतिरिक्त निदेशक राजीव जैन , सूचना प्रसारण दिल्ली

आबू पर्वत ( ज्ञान सरोवर ):  ज्ञान सरोवर स्थित हार्मनी हॉल में ब्रह्माकुमारीज एवं आर ई आर एफ की भगिनी संस्था, ” कला एवं संस्कृति प्रभाग ” के संयुक्त तत्वावधान में एक अखिल भारतीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का विषय था ‘ कलाकार- शांत और आनंददमय जीवन की ओर ‘. इस सम्मेलन में देश के सैकड़ों कलाकारों ने भाग लिया। दीप प्रज्वलन के द्वारा सम्मेलन का उद्घाटन सम्पन्न हुआ।

अतिरिक्त निदेशक ,सूचना प्रसारण मंत्रालय , दिल्ली, राजीव जैन जी ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने उदगार प्रस्तुत किये। अपने कहा की मैं ब्रह्माकुमारीज़ को काफी समय से जानता हूँ। मगर आज यहां आने के अवसर मिला है। यहां जो पाजिटिविटी प्राप्त होती है वह महान है।

कला का भी हमारे ऊपर एक गहरा असर होता है। हम उसे भूल नहीं पाते हैं ताजिंदगी।

मैडिटेशन भी एक आर्ट है। इसका भी काफी गहरा असर हमारे जीवन पर पड़ता है। पाजिटिविटी हमारी भावनावों से जुडी हुई है। जिस भावना से हम कार्य करते हैं उसका असर देर तक और दूर तक महसूस किया जाता है।

कला संस्कृति प्रभाग की उपाध्यक्ष राजयोगिनी कुसुम बहन ने अपना आशीर्वचन सम्मेलन को प्रदान किया। आपने कहा कि जीवन शांतमय और आनंदमय बनाने के लिए परम कलाकार शिव बाबा ने जो कला सिखाई है , उस कला को अपना कर हम अपना जीवन खुशनुमा बना लेंगे। राजयोग एक बड़ी कला है। आप सभी इस योग का अभ्यास जरूर करें। यह आपके कलाकार जीवन को काफी ऊंचाई पर लेकर जायेगा।

राजयोगिनीं ब्रह्माकुमारी निहा बहन, क्षेत्रीय निदेशक , कला संस्कृति प्रभाग , ने आज के इस सम्मेलन का अपना मुख्य सन्देश प्रस्तुत किया। आपने कहा की कला में जब दिव्यता आ जाती है तब वह कला कल्याणकारी बन जाती है। इसीलिए आज कला में दिव्यता लाने की अत्यंत जरूरत महसूस की जा रही है। हम सभी कलाकारों को अपने आतंरिक जगत को जानने और महसूस करने की जरूरत है। दुनिया में भी कोई नायक अलग अलग रोले प्ले करता है मगर घर जाने पर वह खुद की वास्तविकता में ही व्यवहार करता है। वह स्टेज के किरदार नहीं निभाता। हम भी स्टेज के किरदार से अलग सत्ता हैं। उसी सत्ता तक हमारी पहुंच होनी चाहिए। हमें यह जानना होगा की कला को प्रस्तुत करने वाली मैं कौन हूँ ? परमात्मा हमें यही जागृति दिलाते हैं।

अपने वास्तविक स्वरुप से दूर होने के कारण कलाकारों को एक खालीपन महसूस होता है। उस खालीपन को समाप्त करके परम शांति पाने के लिए आंतरिक सत्य तक पहुंचना होगा।

राजयोगी ब्रह्माकुमार करुणा भाई , अध्यक्ष , मीडिया प्रभाग ने अपनी शुभ कामनायें प्रदान कीं। आप सभी ने इस परिसर में आते ही शांति और आनंद की अनुभूति जरूर की होगी – आपके चेहरों से ऐसा पता लग रहा है। लोग इस परिसर को स्वर्ग का प्रतिरूप मानते हैं। लोग यहीं जीवन व्यतीत करने की मनसा रखते हैं।

यहां नर को नारायण और नारी को लक्ष्मी बनने की शिक्षा प्रदान की जाती है। अभी यहां राजयोग का अभ्यास करके हम सभी आने वाली दुनिया में उंच पद प्राप्त कर लेंगे। दिव्य बन जाएंगे।

बहन ज्योति खण्डेलाल , निदेशक , नृत्य ज्योति कत्थक केंद्र , आगरा ने अपनी भावनायें प्रस्तुत कीं। नृत्य के गुरु हैं शिव. नृत्य के माध्यम से ही मेरी मुलाक़ात ब्रह्माकुमारी बहनों से हुई। ब्रह्माकुमारीज़ की शिक्षायें भी शिव बाबा द्वारा प्रदान की जाती हैं। यही मेरा इस संस्था से जुड़ाव का सेतु बना है। यहाँ की दिव्यता की मैं कायल हूँ।

मलयाली फिल्मों की नायिका संयुक्त वर्मा ने भी आज के अवसर पर अपने उदगार प्रकट किये। मैं दूसरी बार यहां आयी हूँ। मैं काफी प्रसन्न हूँ और गौरवान्वित भी हूँ। सभी का मानना है की समस्याओं से बचने के लिए आध्यात्मिकता की जरूरत है। मैं भी वैसा मानती हूँ। बाबा केरल मुझे यहां अरावली तक लेकर आये। बाबा का शुक्रिया।

राजयोगी ब्रह्माकुमार मृत्युंजय , अध्यक्ष शिक्षा प्रभाग ने भी अपने वक्तव्य प्रस्तुत किये। आपने कहा कि कलाकार आने वाले समय को भी आकार देने वाले लोग हैं। कलाकार , ईश्वर के बाद सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। जब हम खुद का सम्मान रखेंगे तभी हम दूसरों को सम्मान दे पाएंगे। अपना सम्मान समझना अनिवार्य है। तीनों कालों को समझने वाला व्यक्ति , वर्तमान काल में जी पायेगा और अपना जीवन उत्तम रख सकेगा।

पंडित हेमंत पांडेय , राष्ट्रीय कत्थक नर्तक ने आज मुख्य अतिथि के बतौर अपनी शुभ कामनायें दीं। आपने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ के सम्पर्क में आने से जीवन में पवित्रता को अपनाने की काफी प्रेरणा प्राप्त होती है। मेरा संदेश आप सभी के लिए यही है की आप कुछ ऐसा बनें की आपको देख कर लोगों के चेहरों पर मुस्कराहट आ जाए।

ब्रह्माकुमारी तृप्ति बहन , क्षेत्रीय निदेशक , भावनगर ने ध्यानाभ्यास करवाया।

फिल्मों और टी वी की मशहूर नायिका श्रीमती अरुणा सांगल ने भी अपने विचार रखे एक सम्माननीय अतिथि के रूप में। आपने कहा कि मैं आध्यात्मिक नहीं हूँ मगर यहां आने पर ऐसा महसूस हुआ है जैसे मैंने काफी कुछ मिस कर दिया है – मैं ने यहां स्वर्ग देखा है। मैं काफी काफी खुश हूँ। अगर हमने इन बातों को जीवन में धारण कर लिया तो क्या कहना। में प्रण करती हूँ की मैं इन शिक्षाओं को जीवन में जरूर धरना करूंगी।

फिल्मों और टी वी की मशहूर नायिका प्रतिमा कनन ने भी अपने विचार रखे। आज मैं समझ नहीं पा रही हूँ की अपने खुद के किरदार को कैसे जीयूं ? अभिनय तो काफी किया है – मगर वास्तविक रोल करना क्यों कठिन लगा रह है , मालूम नहीं।

मैंने आज समझा है की असली कलाकार का क्या अर्थ होता है ! वाह। थैंक यू।

ब्रह्माकुमार सतीश भाई , मुख्यालय संयोजक , कला संस्कृति प्रभाग ने पधारे हुए अतिथिओं को धन्यवाद् प्रदान किया।

करनाल से पधारीं ब्रह्माकुमारी प्रेम बहन ने मंच संचालन किया।