Brahma Kumaris Raipur Pay Homage To Dadi Prakashmani

Raipur ( Chhattisgarh ): Brahma Kumaris, at their Shanti Sarovar Retreat Centre in Raipur, paid homage to Revered Prakash Mani Dadiji her 13th Ascension Day. Dadiji was the Former International Administrator of Brahma Kumaris, Head Quarters at Mount Abu, Rajasthan, India.

Speaking on this occasion, Zonal Director, BK Kamala mentioned, “Real homage to Dadiji would be that when by following her ideals we imbibe her teachings in our life”. Recollecting the services of Dadi Prakash Mani, she said that Brahma Kumari Organization’s services were only within India in the beginning. By her relentless efforts Dadiji expanded services of the Organisation all over the World. In recognition of her Noble Activities she was honoured with the Medal of Peace Ambassador by United Nations. She taught us how to strengthen Organisation by paying mutual regard and by giving importance to the talents of each member.
She said, “Prakash Mani Dadiji has proved that if woman could recognize her latent Powers, she could by becoming Durga, Kali and Sheetala, she could play a Major Role in liberating not only herself but entire World from the Swamp (daldal) of Vices and Sacrilege. It is a wonder of her personality that on reaching into the vicinity of Brahma Kumaris Organization at Mount Abu, everyone felt Blissful, as if they are in Heaven. More than at their own homes they would experience the affinity here”.
She said, “Dadiji was a Karmayogi (One who is always in awareness of God while working) and was an example to follow in striving for Women Empowerment. She had immense Leadership capability and feeling of Motherhood. Her State of Mind was so high that biases of Caste, Creed, Religion, other’s Weaknesses etc., could not even touch her”.
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दादी जी को भावभीनी श्रद्घांजलि
दादी प्रकाशमणी के बताए आदर्शों पर चलना ही उनको सच्ची श्रद्घाजंलि…
ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी प्रकाशमणि को उनकी तरहवीं पुण्यतिथि पर विधानसभा मार्ग पर स्थित शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टरमें श्रद्घाजंलि दी गई। इस अवसर पर बोलते हुए क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी कमला दीदी ने कहा कि दादी जी के आदर्शों पर चलकर उनकी शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का पुरूषार्थ करना ही उन्हें सच्ची श्रद्घाजंलि होगी।
उन्होंने दादी प्रकाशमणि की सेवाओंको याद करते हुए कहा कि पहले ब्रह्माकुमारी संस्थान की सेवाएँ सिर्फ भारत तक ही सीमित थी। दादी जी ने अपने अथक प्रयासों से संस्थान की सेवाओं को सारे विश्व में फैलाया। उनकी सेवाओं को देखते हुए उन्हें संयुक्त राष्ट्र द्वारा शान्तिदूत पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया था। दादी जी ने हमें सिखलाया कि संगठन में एक दो को सम्मान देकर और सभी की विशेषताओं को महत्व देकर कैसे संगठन को मजबूत किया जा सकता है।
दादी प्रकाशमणि ने यह सिद्घ कर दिया कि नारी यदि अपनी शक्तियों को पहचान ले तो वह दुर्गा, काली और शीतला बन अपना ही नहीं वरन् समूचे जगत को विकारों और आसुरियत की दलदल से मुक्त करने में अहम भूमिका निभा सकती है। दादी जी के व्यक्तित्व का ही कमाल था कि माउण्ट आबू में ब्रह्माकुमारी संस्थान के परिसर में पहुंचकर सभी को यह सुखद अहसास होता था कि मानों हम स्वर्ग में आ गए हों। अपने घर से भी अधिक अपनापन वहाँपर अनुभव होता था।
दादी जी कर्मयोगी थीं और महिला सशक्तिकरण की अनुकरणीय मिसाल थीं। दादी जी में नेतृत्व की अपार क्षमता थी। उनके अन्दर नेतृत्व के साथ-साथ मातृत्व का भी असीम भाव था। उनकी मन:स्थिति इतनी उँची हो चुकी थी कि किसी की कमी-कमजोरी, जाति-पाँति, धर्म आदि का भेदभाव उनको कभी छू तक नहीं पाया।