Brahma Kumaris Nagpur pay tribute to Dadi Prakash Mani

Nagpur ( Maharashtra ): On 13th Ascension Day of Dadi Prakash Mani, hearty tribute was paid to her by all surrendered members of Brahma Kumaris of Nagpur Sub Zone at Vishwa Shanti Sarovar Training Centre.

On this occasion BK Rajani, Centre in Charge said, “Prakash Mani Dadi was very broad hearted. On 18th January, 1969, when Brahma Baba left the world, entire responsibility came on her shoulders as the Chief Administrator of the Organisation, which she very successfully took it ahead. By her foresight and dedication she could establish 4500 Centres in 140 Countries across the World, during her tenure upto 2007. Due to her relentless services for the Welfare of Mankind, United Nations has offered the prestigious Consultative Membership to Brahma Kumaris as an NGO. Dadi was rich in Mercy, Compassion and Generosity. She was the Personification of Sacrifice and Penance “.
BK Manisha, Deputy Director, Brahma Kumaris Centres, Nagpur said that Dadi had no trace of Ego. She did everything as a Trustee, leaving the responsibility on God, the Supreme Father. She was Selfless Service Minded.
BK Prem Prakash said that for serving people of Maharashtra, Prakash Mani Dadi started Marathi Literature Department and entrusted him with a good fortune to serve in that Department. Entire BK Family offers millions of their hearty regards to such Beloved Dadi. 
News in Hindi:

प्रेस विद्यप्ति दादी प्रकाशमणी जी के 13 वे पुण्यस्मृति दिन पर

विश्व शांति सरोवर में श्रध्दांजली कार्यक्रम

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की दिवंगत माजी मुख्य प्रशासिका दादी प्रकाशमणी जी का 13 वा स्मृति दिवस 25 अगस्त को मनाया गया। नागपुर सबजोन के विश्व शांति सरोवर ट्रेनिंग सेंटर में नागपुर के सभी समर्पित भाई बहने कार्यक्रम में उपस्थित थे।

इस कार्यक्रम के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज्, नागपुर की संचालिका आदरणीया रजनी दीदी जी ने अपने श्रध्दांजली वक्तव्य में कहां कि प्रकाशमणी दादी जी विशाल दिल की धनी थी। उनके कार्यकाल में ब्रह्माकुमारीज् संस्था को संयुक्त राष्ट्रसंघ का सलाहाकार सदस्यत्व प्राप्त हुआ। प्रतापिता ब्रह्मा बाबा के अव्यक्त होने के पश्चात 18 जनवरी 1969 को इस विशाल विद्यालय कि जिम्मेवारी सौपी गई। 1969 से 2007 तक दादी जी ने इस विश्व विद्यालय कि बागडोर संभाली । दादी जी की दूरदर्शिता एवं कर्तव्य निष्ठा ने दादी जी के उपस्थिती में 140 देशों में 4500 सेवाकेंद्र खुले। दादीजी दया, करुना, उदारता की धनी थी। त्याग तपस्या की प्रतिमुर्ती थी।

ब्रह्माकुमारीज्, नागपुर की उपसंचालिका आदरणीया मनिषा दीदी जी ने कहां दादीजी मै और मेरे पन से कोसो दुर थी। दादी जी समझती थी कि, खुद को हेड समझने से हेडेक होता है इसलिये सबकुछ परमपिता परमात्मा को समर्पित कर खुद को निमित्त समझकर चलो। दादीजी में निस्वार्थ सेवाभाव था। मराठी साहित्य विभाग महाराष्ट्र के व्यवस्थापक ब्रह्माकुमार प्रेमप्रकाश भाई जी ने कहां कि महाराष्ट्र के जनता की सेवा के लिये दादीजी ने मराठी साहित्य विभाग शुरु करके मुझे उस सेवाके लिये निमित्त बनने का सुअवसर दिया। ऐसी दादी जी को सभी बी.के. परिवार कोटी कोटी श्रध्दा सुमन अर्पित करता है।