Brahma Kumaris Dhamtari Pay Homage to Dr. Dadi Prakashmani

Dhamtari ( Chhattisgarh ): The former Chief Administrator of Brahma Kumaris, Rajayogini Dadi Prakashmani, was paid a respectful and loving homage on her 13th Death Anniversary by Brahma Kumaris, Dhamtari. This day is celebrated as “Vishva Vasudeva Kutumbhikam Day” ( “One God, One world-One Family day”).

In 1969, when Prajapita Brahma left his mortal coil, Dadi Prakashmani ji not only led the organization efficiently but took it to unimaginable heights.

Centre in-charge of Dhamtari, BK Sarita, fondly remembered the days she had spent with Dadiji and recalled how easily she could win everyone’s heart with her divine simplicity and politeness. The last words of Dadi Prakashmani were:  “Be a Trustee, remain humble, speak sweetly but truthfully.”

Brahma had willed his powers and capabilities to her which she used to the best of her ability to take care of this “mahayagya” (organization). It appeared as if God Himself always kept a loving watchful eye on this great soul.

In Dadi ji’s practical life, it was witnessed how she managed with skill and ease such a huge organization of thousands of brothers and sisters.

Once in a conference with a media person, Dadi ji was asked how she could be the head of such a big organization without ever getting a headache. To this, Dadi ji had very humbly responded, “I never consider myself to be a head.” In fact, Dadi ji was the head of this Godly Family in which every member felt very cared for and loved deeply.

On 25th August, 2007, this great soul departed from this world to continue with her services in an unlimited way.

News in Hindi:

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय धमतरी के द्वारा ब्रह्माकुमारीज की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि जी के 13वी पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस दिन को “विश्व वसुधैव कुटुंबकम दिवस” के रूप में मनाया जाता है। ब्रह्माकुमारीज के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के अव्यक्त होने के बाद सन् 1969 से दादी प्रकाशमणि जी ने संस्था का नेतृत्व किया और आगे बढ़ाया। दादी जी की पुण्यतिथि पर ब्रह्माकुमारीज धमतरी की संचालिका सरिता दीदी जी ने दादीजी के साथ बिताए पल को स्मरण करते हुए कहा कि दादी जी अपने दिव्य गुणों विनम्रता और सादगी से सभी के दिलों को जीत लेती थी। उनके अंतिम बोल थे निमित्त भाव, निर्माण भाव और निर्मल वाणी। बाबा ने उनमें अनेक शक्तियां और काबिलियत भर दी थी जिससे उन्होंने इतने बड़े महायज्ञ को संभाला। वह एक ऐसी महान आत्मा थी जिस पर भगवान की नजर रहती थी। अभी तक हमने सुना था कि भगवान करनकरावनहार है। यह हमने दादी जी के जीवन में प्रैक्टिकल देखा कि इतने बड़े यज्ञ का संचालन जिसमें हजारों भाई-बहन समर्पित है, इतने सेवा केंद्र हैं, सेवाएं हैं उन सब का संचालन कुशलतापूर्वक लाइट रहकर दादी जी ने किया। दादी जी मुख्य प्रशासिका ही नहीं थी लेकिन एक परिवार की मुखिया भी थी जो सभी को बहुत प्यार से पालना भी देती थी।

एक बार मीडिया प्रभाग के सम्मेलन में दादी जी को पूछा गया दादी आप इतने बड़े संस्था की हैड हो तो आपको कभी हेडेक नहीं होता तो दादी ने बहुत सुंदर जवाब दिया मैं कभी अपने को हैड समझती ही नहीं जिससे हेडेक हो। दादी इतनी निर्माण थी। ऐसी महान दादी जी ने 25 अगस्त 2007 को अपने पुराने देह का त्याग कर बेहद सेवा के लिए प्रस्थान हुई।