Brahma Kumaris Dhamtari Honoured on Guru Purnima Day

Dhamtari ( Chhattisgarh ): Guru Purnima is an Auspicious Day in India when Guru, the Preceptor, Spiritual Teacher is being adored with gratitude. To celebrate Guru Poornima, Dignitaries of Dhamtari City arrived at the Centre of Brahma Kumaris and honoured all by offering Shawls and Coconuts.

Chiefly Mr. Ramu Rohra, BJP District President; Advocate Parvati Wadhwani; Mr. Jaspal Singh Deo, Property Dealer; Mrs. Sushma Nanda, Social Activist and Mr. Shyam, Staff of MGTV were instrumental for the function.

The Centre in Charge BK Sarita on this occasion paid her multiple Ovation to Incorporeal, Supreme Father, Supreme Teacher, Supreme Guru, Supreme Soul, God Shiva. He who descends at the last phase of World Cycle, to transform the old Vicious Kaliyugi World into a new Viceless Satyugi World. He offers a Third Eye of Wisdom and removes Darkness of Ignorance. By His Selfless Fatherly Love liberates the Souls, His Children, from this World and guides to get reborn in new World with no bondages. Thus souls may get freed from their pains and sorrows they accrued as results of sinful deeds they did in life due to ignorance.

She said, “In history the popular example of Guru Dronacharya is there. He asked Ekalavya to offer his right hand Thumb as Guru Dakshina (Fees). So here Thumb represents Firm Commitment or Powerful Will. On this Day we too have to offer Thumb of any Positive Will to Supreme Soul as Guru Dakshina”.

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धमतरी: गुरूपूर्णिमा के उपलक्ष्य में शहर के गणमान्य नागरिको द्वारा ब्रह्मा कुमारी सेवाकेंद्र पर आकर ब्रह्मा कुमारी बहनों का श्री फल , शॉल द्वारा सम्मान किया गया। इसमें मुख्य रूप से उपस्थित रहे पूर्व जिलाध्यक्ष बी .जे. पी. रामू रोहरा जी, सुश्री पार्वती वाधवानी वकील,जसपाल सिंग देऊ प्रॉपर्टी डीलर,सुषमा नंदा समाजसेवी,श्याम भाई, एम. जी. टी वी चैनल के कार्यकर्ता।

इस अवसर पर ब्रह्मा कुमारी सरिता दीदी ने कहा गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर निराकार परमपिता, परम शिक्षक, परम सतगुरु परमात्मा शिव को कोटि कोटि वंदन जो इस सृष्टि चक्र के अंतिम समय पर अवतरित हो कर पुरानी विकारी कलियुगी दुनिया को नयी निर्विकारी सतयुगी दुनिया में परिवर्तित करते हैं, ज्ञान का तीसरा नेत्र देकर अज्ञान अन्धकार का नाश करते हैं, निःस्वार्थ पितृ स्नेह से अपने आत्मारुपी बच्चों को मुक्ति व जीवन मुक्ति का मार्ग दिखलाते हैं जिससे आत्माओं को कष्ट पीड़ा एवं दुखों से निवृत्ति मिल जाये जो अज्ञान व पाप कर्मों के दुष्परिणाम हैं ।
इतिहास में प्रसिद्ध उदाहरण है गुरु द्रोणाचार्य ने एकलव्य से गुरु दक्षिणा के रूप में अंगुठा मांगा।वर्तमान समय सर्वोच्च सतगुरु परमात्मा भी हमसे गुरु दक्षिणा मांगते हैं ।अंगूठा है ध्रढ संकल्प अर्थात पावरफुल संकल्प का।आज के दिन कोई भी पॉजिटिव संकल्प का अंगूठा परमात्मा को गुरु दक्षिणा के रूप में देना है।