Brahma Kumaris Celebrate International Women’s Day

Ajmer (Rajasthan): The Brahma Kumaris center of Dwarka Nagar in the Ajmer district organized a function to celebrate International Woman’s Day with the theme  “Woman as the Cultural Savior.”

The chief guest on this occasion was Ms. Anita Bhadel, Former Women and child development minister. Speaking on this topic, she said that who can protect the cultural ethos better than women? In the present times, the majority of Indians are blindly aping Western civilization. To reconnect with our original divine culture should be the aim of all Indians now.

BK Shanta, organizer of the program and zonal head of the Brahma Kumaris, said that we can still find traces of our original divine culture in many homes across the country. Famous author Dhwani said that woman is the equal creator of the entire humanity.

BK Rupa said that there is a woman’s support behind every successful man. But the irony is that, until today, the women of this world could never come together to create a new world. A mother has the power to impart good morals to the entire family. Every woman has infinite capacities to nurture and create; only, she should know about these powers of hers.

BK Indira talked about the significance of Rajyoga Meditation. Song and dance performances enlivened the event. About 125 females from different walks of life participated.

आंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर”संस्कृति की संरक्षक नारी” विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन ब्रह्माकुमारिज शिव वरदान द्वारका नगर द्वारा किया इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पूर्व महिला एवम बालविकास मंत्री उत्तर क्षेत्र विधायिका श्रीमती अनिता भदेल जी ने कहा संस्कृति की संवाहक एक महिलासे बढ़कर और कौन हो सकता है।वर्तमान में हम सभी पश्चात्य संस्कृति का अनुसरण कर देश की धरोहर को नुकसान पहुचा रहे है अतःहैम सभीको पुनः अपने संस्कारो को पुनर्जीवित कर भारतीय संस्कृति को पुनःस्थापन करनेमे अग्रसर रहना है।कार्यक्रम की अध्यक्षता अजमेर सम्भाग की क्षेत्रीय संचालिका राजयोगिनी शांता दीदीजी ने कहा कि हमारी देव संस्कृति आज भी हर घर मे देवत्व के दर्शन कराती है । प्रसिद्ध लेखिका ध्वनि जी ने नारी को सृष्टिकर्ता की संगिनी कहकर संबोधित किया।विशिष्ट अतिथि होंगी।पत्रकार रषिका महर्षि,और नसीराबाद पार्षद चारुलता जी शामिल हुये।बी के रूपा बहन ने कहा कि जिन पुरुषों ने कीर्तिमान स्थापित किये , उन सभी के पीछे नारियों का बलिदान रहा है। अर्थात महिलाओं ने गुप्त रहकर अनेक महान कार्य किये हैं। मगर अफ़सोस यह है की आज तक भी महिलाओं ने मिलकर मूल्यवान संसार का निर्माण नहीं किया है। कहीं न कहीं कुछ कमी भी रह गयी है।
नैतिकता सुन्दर शिक्षाओं को प्रदान करने से नहीं आएगी । माँ अथवा नारियां अपने नैसर्गिक गुणों के कारण मूल्यों को स्थापित कर सकती हैं। लोग घर बार छोड़ कर जंगलों में चले जाते हैं। मगर उससे क्या होगा ?? माँ तो घर में रह कर ही अपने बच्चों को मूल्यवान बना पाती हैं। बच्चे मात्र पुष्ट रहें यह काफी नहीं है बल्कि उसके विचार भी मूल्यवान रहें – यह अनिवार्य है। त्यागमूर्त माँ अपने आचरण से अपने बच्चों को महान बना सकती हैं।
आपने कहा नारी शक्ति का दूसरा नाम माँ है। माँ , जैसे संस्कार बच्चों में डालना चाहे – डाल सकती हैं। नारियों में अपार शक्तियां हैं। जरूरत है उसको उभारने की। नारियों को अपने जीवन में मूल्यों को जागृत करने की जरूरत है। पवित्रता ,शांति ,प्रेम और शक्तियों के जागरण से वह समाज के साथ साथ विश्व को दिशा दे सकती है।
बी के इंद्रा ने राजयोग का महत्त्व समजाया और बी के ज्योति ने चिकन डांस से सभी को उमग उत्साह दिलाया।कार्यक्रम में भ्राता मौर्यनीजी ने मनमोहक गीतोसे सबको बहलाया।