Brahma Kumaris Bilaspur Celebrate International Yoga Day

Bilaspur ( Chhattisgarh ): On International Yoga Day, BK Swati, the Rajayog Bhawan Centre in Charge of Bilaspur in Chhattisgarh, arranged a program of Yoga with her associates at the Centre.

Starting at 6 am in the morning, they sat in Rajayog Meditation sending vibrations for World Peace, while the song, “We call you to tread the path of Yoga” was being played.

After Meditation, BK Swati shared that Rajayoga is the basis to awaken all the latent Powers of Mind. She said India is the Master of ancient Yoga; this is why the entire world looks to India in matters of Yoga. It is an Indian art existing for thousands of years. Yoga is a way to keep the body fit and healthy, but it is not only limited to physical body exercises. Yoga literally means addition. It is an Art to Unite the Soul with Almighty Supreme Soul.

By developing divine qualities, various talents and positive changes in us take place.  Rajayoga awakens latent energies, enhances our working skills, opens up softness in behavior, feeling the world as one family with good relationships. Rajayoga renders the mind cool and tension-free. Mind becomes relaxed, improving concentration that leads to success in a short time. It inspires us to think high, understanding internal and external worlds better to make our lives more valuable. She said that Rajayoga is the only way to have sound Mental, Physical and Social health.

Since 1978, on every 3rd Sunday, BK Swati said, Rajayoga Meditation for World Peace is being done at the Centre by all. She said that for the total development of humanity, both body and mind need to be healthy. Yoga gives longevity of life. In Yoga we go deep inside to know our real identity and remain stable in that state. She said that every individual wants to be happy and peaceful but that cannot be acquired in material means. Only Rajayoga is the source to awaken the dormant powers of Mind. She said that everything starts in the Mind.  About 80% of physical sickness are because of mental tension. It is said, “As the Mind so is the Body.” She said that no physical exercises are taught in Rajayoga, rather everything is explained on the basis of a spiritual and psychological perspective. Rajayoga is a way of life. It is not limited to a code of wearing any special dress and sitting for some time daily. From dawn to dusk is a lifestyle to keep mind contemplating with pure thoughts on God.

During the program, all members demonstrated Yoga by doing Pranayam, Tadasan, Vrukshasan, Bhadrasan, Vajrasan, Anulom Vilom, Bhramari Pranayam and Surya Namaskar to explain the Yogic Life on the physical level.

News in Hindi:

मन की शक्तियों को जागृत करने का आधार राजयोग – बी.के. स्वाति

बिलासपुर:  प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थानीय शाखा राजयोग भवन की संचालिका बी.के. स्वाति दीदी ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में बताया कि भारत देश प्राचीन योग का स्वामी है। उस स्वामित्व के कारण ही आज पूरा विश्व यदि योग के लिए कहीं देखता है तो सिर्फ भारत देश की तरफ ही देखता है। योग भारत की एक प्राचीन कला है और हजारों वर्षों से अस्तित्व में है। हम योग को सिर्फ योगासनों तक ही सीमित समझते है परन्तु योगासन तो एक शारीरिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। किन्तु योग का शाब्दिक अर्थ है जोड़ना। राजयोग द्वारा हम अपने मन को सर्वशक्तिमान परमात्मा से जोड़ने की विधि सीखते है। राजयोग के अभ्यास से मन में सकारात्मक परिवर्तन, दिव्य गुणों व विविध कलाओं का विकास होता है। राजयोग अन्तर्रात्मा की सुषुप्त शक्तियों को जागृत कर कर्मों में कुशलता, व्यवहार में सौम्यता और विश्व-बंधुत्व की भावनाओं को बढ़ावा देता है। राजयोग के अभ्यास द्वारा तनावग्रस्त मन को शान्ति की अवस्था में लाते है जिससे हमारा मन रिलैक्स होकर सशक्त बनता है। राजयोग का अभ्यास हमें एकाग्रचित्त होने में मदद करता है जिससे हम कम समय में ही सफलता प्राप्त कर सकते है। राजयोग हमें श्रेष्ठ चिंतन करने की प्रेरणा देता है जिससे हम आंतरिक और बाह्य जगत को समझकर अपने जीवन को मुल्यनिष्ठ बनाते है। राजयोग के अभ्यास से ही शारीरिक, मानसिक व सामाजिक स्वस्थता प्राप्त की जा सकती है।

प्रातः 6:00 बजे योग के मार्ग पर हम बुलाते तुम्हें गीत के द्वारा ब्रह्माकुमारी बहनें राजयोग का अभ्यास करते हुए सारे विश्व में शांति के प्रकम्पन फैला रही थी। दीदी ने कहा कि संस्था के द्वारा 1978 से माह के तीसरे रविवार को विश्व शांति के लिये योगाभ्यास किया जाता है। मनुष्य के सर्वांगीण विकास के लिए तन व मन दोनों का स्वस्थ होना जरुरी है। योग मनुष्य को दीर्घ आयु प्रदान करता है। योग में हम अन्तरात्मा का निरीक्षण करके अपने भीतर की गहराई में, अपने अस्तित्व में प्रवेश करते है। प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में सुख-शांति की इच्छा रखता है और वह भौतिक साधनों से प्राप्त नहीं की जा सकती। मन की शक्तियों को जागृत करने का आधार राजयोग ही है। प्रत्येक चीज मन से ही प्रारंभ होती है। 80 प्रतिशत शारिरिक रोग मानसिक तनाव के कारण ही होते है। कहा जाता है जैसा मन वैसा तन। राजयोग में शारिरिक आसन नहीं बताया जाता लेकिन हरेक बात आध्यात्मिकता एवं मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर व्यवहारिक रूप से समझाई जाती है। राजयोग एक जीवन पद्धति है जिसे दिन के कुछ समय के लिए, किसी विशेष वस्त्र को धारण कर बैठने तक सीमित नही किया जा सकता। अपने दिन की शुरुवात से लेकर, दिन के अन्त तक निरन्तर शुद्ध विचारो में रमण करना और मन को ईश्वर पर केन्द्रित करना, यही संपूर्ण एवं व्यापक जीवनशैली हैं।

योगी जीवनशैली बनाने के लिये ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा योगा-प्राणयामक, ताड़ासन, वृक्षासन, भद्रासन, व्रजासन, अनुलोम विलोम प्रणायाम, भ्रामरी प्रणायाम, सूर्य नमस्कार आदि अभ्यास किया गया।