Brahma Kumaris Alirajpur Celebrate Independance Day

 Alirajpur ( Madhya Pradesh ) : The whole nation is  celebrating 74th Independence Day, free from the slavery of the British. But even then, day by day human beings kept getting trapped into many evils, religion, caste, language  apartheid, mental bondage diseases and  their own habits. Due to which the human mind is unable to experience freedom,  openness and, independence like true   birds. Despite being full of material resources, dark clouds of unhappiness, impurity, stress, fear,despair, fear are all around . Humans are distancing themselves from each other, father from child, husband from wife, an unknown fear is haunting everyone day and night, “what will happen now”? It is becoming a question of concern. The current COVID-19 pandemic has made everyone more afraid. Having vicious, tamo-dominated intellect, humans are getting imprisoned in the chains of their own thoughts day by day, like how Abhimanyu got trapped in his own labyrinth. So proud of his intellect that a human being does not recognise himself as a human being. BK Narayan Bhai, the pioneer of the art of living from Indore, was addressing his ideas to the citizens of the city at the Brahma Kumari auditorium in city on Independence Day.

Center in charge BK Madhuri told that in such a situation only supreme divine power can liberate from the ropes of these bonds, not human power. We are seeing the glimpse of human efforts day by day that life is moving towards slavery instead of freedom. The day we break all these ties and bonds, the flag of the celebration of true  freedom will be hoisted in the lap of Mother Earth. Now soon, the true freedom of human mind, the flag of freedom, Gandhi of whole world, the incorporeal Supreme Father, God Shiva, had been running this great work for the last 85 years, so that not only India, the whole world will celebrate true freedom. WithTtue love for human beings, sympathy for each other, there will be no feelings of revenge for anyone in the mind.

Social worker Madan Parwal said that for this, I am not the body, but I am the immortal imperishable point of light, soul who runs this body. Time and our own consciousness warns that only by knowing, recognizing and empowering one’s own powers, breaking the ropes of these body, bodily religions and substances, the realization of true freedom can be experienced.

News in Hindi:       

देश आजाद हुआ परंतु मानव मन आजाद नहीं हुआ।

 अलीराजपुर : पूरा राष्ट्र अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हुए 74 वी स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, मनाने में परहेज क्यों? परंतु फिर भी मानव दिन प्रतिदिन अनेक बुराइयों ,  धर्म, जाति ,भाषा रंगभेद, मानसिक बंधनों बीमारियों व अपनी आदतों में जकड़ता चला गया। जिससे मानव मन सच्ची पंछी जैसे आजादी खुलापन ,स्वछंदता का अनुभव नहीं कर पा रहा है । भौतिक संसाधन भरपूर होते हुए भी  आज चारों और दुख अशांति , अपवित्रता, तनाव  डर, निराशा,भय के काले बादल चारों और मंडरा रहे हैं। मानव मानव से ,बाप बच्चे से, पति पत्नी से दूरियां बना रहा है, एक अज्ञात सा भय दिन-रात सभी को सता रहा है, अब क्या होगा? यह चिंता का प्रश्न बनता जा रहा है। वर्तमान कोरोना वायरस ने सभी को ज्यादा ही भयभीत कर दिया है। विकार ग्रसित, तमो  प्रधान बुद्धि होने के कारण मानव  दिन प्रतिदिन अपने ही विचारों की जंजीरों में कैद होता जा रहा है ,जैसे अभिमन्यु अपनी बनाए हुए चक्रव्यूह में फंस गया है। ऐसे आज इंसान अपनी बुद्धि का परचम का झंडा चंद्रमा मंगल पर जाकर लहरा रहा है। अपनी बुद्धि पर इतना गर्व है कि वह स्वयं को स्वयं, मानव को मानव के रूप में नहीं पहचान रहा है ।यह  विचार  इंदौर से पधारे  जीवन जीने की कला के प्रणेता ब्रह्माकुमार  नारायण भाई ने दीपा की चौकी में स्थित ब्रह्माकुमारी सभागृह में  नगर वासियों को  स्वतंत्रता  दिवस के बारे में  संबोधित करते हुए बताया।सेवा केंद्र संचालिका ब्रम्हाकुमारी माधुरी बहन ने बताया ऐसे में इन  बंधनों की रस्सियों से कोई सर्वोच्च ईश्वरीय शक्ति स्वतंत्र करा सकती है। मानव शक्ति नहीं ।मानवीय प्रयास की झलक तो हम दिन प्रतिदिन देख ही रहे हैं कि जीवन स्वतंत्रता के बजाय परतंत्रता, गुलामी की ओर बढ़ता ही जा रहा है। जिस दिन हम इन सभी रशियों, बंधनों  को तोड़ देंगे उस दिन ही सच्ची आजादी का जश्न का झंडा इस धरती माता की गोद में फहराया जाएगा ।अब शीघ्र ही मानव मन की सच्ची आजादी का , स्वतंत्रता का झंडा सारी विश्व का गांधी निराकार परमपिता शिव परमात्मा यह महान कार्य विगत 85 वर्षों से चला रहे हैं जिससे भारत ही नहीं सारा विश्व सच्ची आजादी का जश्न मनाएगा । मानव  मानव के लिए सच्चा प्यार , एक दूसरे प्रति सहानुभूति, मन में किसी के लिए वेर, बदले की भावन नहीं होंगी।समाजसेवी मदन परवाल ने बताया कि इसके लिए स्वयं को जो  मेरा वास्तविक स्वरूप है, मैं देह नहीं हूं बल्कि इस देह को चलाने वाली अजर अमर अविनाशी ज्योति बिंदु आत्मा हूं उसे जानना मानना अनुभव करने की आवश्यकता है ।अब समय, स्वयं की चेतना चेतावनी दे रहा है कि स्वयं की शक्तियों को जाने, पहचाने और अपने को शक्तिशाली बनाकर इन देह, देह  के धर्म  व पदार्थों की रस्सियों  को  तोड़कर सच्ची आजादी का अनुभव करें।