55th Ascension Day of Mateshwari Jagadamba Saraswati Observed by Brahma Kumaris

Indore ( Madhya Pradesh ):  “In the year 1936 at the age of 16 years, she came as Om Radhey in contact of this Organization and she imbibed the Spiritual Knowledge of Supreme God Father, spoken from the mouth of Prajapita Brahma, instantly in her life and became the True Goddess of Knowledge Mother Saraswati. She taught others the ways of contemplating deeply Secrets of Wisdom and adopting easily in life.” These words were narrated by BK Hemlata, Chief Zonal Coordinator of Indore, at Gyan Shikhar Om Shanti Bhawan, in honour of the First Chief Administrator of the Brahma Kumaris.

She said that although Incorporeal God Shiva gave Wisdom through Brahma, the urn of Knowledge was put on the Head of Women Shakti. Among them Mateshwari Jagadamba was the First to take up Responsibility. She was very young, still being shrewd in Divine Wisdom, Qualities and Powers; she ably looked after others of all age. She was the Personified Peace, Simplicity and Compassion, Goddess of Purity. The Sapling that was planted by Brahma Baba and Mateshwari has today grown into an enormous Brahma Kumaris Organization in 140 countries, serving to transform the lives of many lakhs of people. BK Hemlata inspired all to tread the path shown by Mateshwari Saraswati.

BK Hemlata offered a garland on Mother’s photo in silence with her reverence. BK Anita, BK Usha, BK Astha, and the residents of Om Shanti Bhawan also paid their reverences. People in association of the Centre watched the program and paid their regards through YouTube.

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साक्षात् ज्ञान की देवी थी मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती
इंदौर, 24 जून। मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती को देखते ही उनका ज्ञान स्वरुप और मातृवत प्यार सभी को खींचता था। ब्रह्माकुमारी संस्थान की स्थापना के समय 1936 में मात्र 16 वर्ष की उम्र में ऊँ राधे क रुप में संस्था के संपर्क में आई और प्रजापिता ब्रह्मा के मुख से सुनाये गये ज्ञान सागर परमपिता परमात्मा के ज्ञान को जीवन में आत्मसात कर साक्षात् शिक्षा की देवी माँ सरस्वती बन गई। उन्होंने ज्ञान के गुह्य रहस्यों को मनन चिंतन कर सहजता से जीवन में धारण करने की विधि सभी को समझाई।
उक्त उद्गार ज्ञानशिखर ओमशान्ति भवन में इंदौर जोन की मुख्य क्षेत्रीय समन्वयक ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने ब्रह्माकुमारी संस्थान की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती की 55वीं पुण्य स्मृति दिवस (आज 24 जून) पर आयोजित एक सादे समारोह में उनका जीवन चरित्र सुनाते हुए रखे । आगे आपने बताया कि निराकार परमात्मा शिव ने इस धरती पर आकर सत्य ज्ञान देने के लिये प्रजापिता ब्रह्मा को अपना माध्यम बनाया लेकिन ज्ञान का कलष नारी शक्ति के उपर रखा, उन्हीं मातृशक्ति में सर्व प्रथम अग्रणी बनी मातेश्वरी जगदम्बा । शरीर की आयु कम होते हुए हुए भी ईश्वरीय ज्ञान गुणों और शक्तियों को जीवन में आत्मसात कर सभी उम्र के लोगों को आलौकिक पालना दी। वे स्वभाव से शांत सरल और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति थी पवित्रता की देवी थी । 1936 में ब्रह्मा बाबा व मातेश्वरी जी के द्वारा लगाया पौधा आज विशाल ब्रह्माकुमारी संस्थान के रुप में 140 देशों में लाखों आत्माओं के जीवन को श्रेष्ठ बनाने का कार्य कर रहा है। हेमलता दीदी ने सभी को मातेश्वरी सरस्वती के बताये मार्ग पर चलने के लिये प्रेरित किया।
कार्यक्रम के शुभारंभ में ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने मातेश्वरी जगदम्बा के चित्र में माल्यार्पण करते हुए मौन रहकर अपने श्रद्धासुमन अर्पित कियां इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी अनिता दीदी, उषा दीदी,आस्था दीदी एवं ओमशान्ति भवन निवासी भाई बहने उपस्थित थे । संस्थान से जड़े भाई बहनों ने यूट्यूब के माध्यम से प्रवचन सुनेएवं अपनी श्रद्धान्जली अर्पित  की।