Moral Education: A Necessity

Ajand (Madhya Pradesh): The Brahma Kumaris World Spiritual University organized a program on the “Importance of Moral Education” at Ajand Public School in Madhya Pradesh. The main speaker on this occasion was BK Bhagwan from Mount Abu.

Speaking on the occasion, BK Bhagwan said that while physical education helps us in getting employment and surviving in this world, it is incapable of helping us deal with situations at home, work and society. Moral education makes the character shine and improves the personality. Lack of morals today is the main reason behind many social and national problems. It is a must for social upliftment. A man’s character speaks louder than any words.

He further enunciated the role of morals in combatting greed, violence and perversion in society. If people have a strong inner core, they will find it easy to deal with difficult situations in life. Children who are taught the importance of honesty, cooperation, fairness, obedience and punctuality, etc., go on to become good citizens and live well. They understand how to sift good from the bad in life. Being moral is the bedrock of spiritual life.

BK Meena, Head of the Brahma Kumaris center in Ajand, said that at present, children with sound moral values are the real treasure of this nation. BK Sitaram told the audience about the Brahma Kumaris. Tree planting was also done on the occasion. The guests and students were also shown how to practice Rajyoga Meditation.

In Hindi:

अंजड (मध्यप्रदेश )— अंजड पब्लिक स्कूल में नैतिक शिक्षाका महत्व विषय पर प्रोग्राम

इस अवसर पर भगवान् भाई ने कहा कि भौतिक शिक्षा सेहम रोजगार प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन परिवार, समाज,कार्यस्थल में परेशानी या चुनौती का मुकाबला नहीं करसकते उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यों से व्यक्तित्व मेंनिखार, व्यवहार में सुधार आता है।नैतिक मूल्यों का ह्रासव्यक्तिगत, सामाजिक, राष्ट्रीय समस्या का मूल कारण है।समाज सुधार के लिए नैतिक मूल्य जरूरी है।उन्होंने कहा किनैतिक शिक्षा की धारणा से, आंतरिक सशक्तीकरण सेइच्छाओं को कम कर भौतिकवाद की आंधी से बचा जासकता है। व्यक्ति का आचरण उसकी जुबान से ज्यादा तेजबोलता है। लोग जो कुछ आंख से देखते हैं। उसी की नकलकरते हैं।

भगवान् भाई ने कहा कि हमारे जीवन में श्रेष्ठ मू््ल्य है तोदूसरे उससे प्रमाणित होते हैं।जीवन में नैतिक मूल्य होंगे तोआदमी लालच, हिंसा, झूठ, कपट का विरोध करेगा औरसमाज में परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा नैतिकता सेमनोबल कम होता है।उनहोंने कहा कि मूल्यों की शिक्षा सेही हम जीवन में विपरीत परिस्थिति का सामना कर सकतेहैं। जब तक हम अपने जीवन में मूल्यों और प्राथमिकता कानिर्धारण नहीं करेंगे, अपने लिए आचार संहिता नहीं बनाएंगेतब तक हम चुनौतियों का मुकाबला नहीं कर सकते।

बी के भगवान् भाई ने कहा कि नैतिक शिक्षा का अर्थ उस शिक्षा से है जो बच्चे में नैतिकता के गुणों का विकास करती है | बच्चों को संस्कारों से जोड़ती है | उन्हें उनके कर्तव्यों का ज्ञान कराती है | परिवार, समाज, समूह के नैतिक मूल्यों को स्वीकारना तथा सामाजिक रीति – रिवाजों, परम्पराओं व धर्मों का पालन करना सिखाती है |

भगवान् भाई ने कहा कि नैतिक शिक्षा का अर्थ और मूल्य जानने के बाद आप यह समझ ही गए होंगे कि नैतिक शिक्षा का हमारे जीवन में क्या महत्व है और यह कितना आवश्यक है | जिन बच्चों को बचपन से ही सच बोलना, सहयोग करना,दया करना, निष्पक्षता, आज्ञापालन, राष्ट्रीयता, समयबद्धता,सहिष्णुता, करुणा, आदि मानवीय गुणों को सिखाते है उन्हीं बच्चों में बाद में चलकर ये ही गुण पुष्पित, पल्लवित, व विकसित होकर चरित्र निर्माण में सहायक होते है |

उन्होंने ने बताया की बचपन से ही बच्चों को नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाने से उन्हें भले – बुरे, उचित – अनुचित का ज्ञान हो जाता है | वह समझने लगता है कि कौन सा व्यवहार सामाजिक है और कौन सा व्यवहार असामाजिक | किन व्यवहारों को करने से समाज में प्रतिष्ठा, प्रंशसा एवं लोकप्रियता मिलती है और किससे नहीं |

डायरेक्टर —महादेव धनगर जी भी अपना उद्बोधन देते हुए कहा कि नैतिक मूल्यों से ही समस्या का मुकाबला नहीं कर सकते। चरित्र उत्थान और आंतरिक शक्तियों के विकास के लिए आचार संहिता जरूरी है। उन्होंनेे अंत में नैतिक मूल्यों का स्रोत आध्यमित्कता को बताया। जब तक आध्यात्मिकता को नहीं अपनाएंगे जीवन में मूल्यों की धारणा संभव नहीं है।

बी के मिना बहन जी ने कहा के वर्तमान में बच्चो को अच्छे संस्कार कि आवश्यकता है उन्होंने बताया कि संस्कारित बच्चे देश कि सच्ची सम्पति है

बी के सीताराम भाई ने ब्रह्माकुमारी सस्था का परिचय कराया