Brahma Kumaris Increase the Morale of Prisoners

BK Bhagwan presenting a Godly gift to Jail Superintendent BS Batham

Alirajpur (Madhya Pradesh): “Crime-Free Life”: A Program on Prevention of Crime and having Good Conduct was organized in the district jail by Brahma Kumaris in Alirajpur.

Keynote Speaker BK Bhagwan from Mount Abu said that whatever seed is sown, so is the fruit. He said that thoughts in our mind come before doing karma. In thoughts, we create love or hatred for someone. By hating someone and thinking badly, the other person will also reciprocate with similar feelings. He said that “he who gives sorrow never gets happiness, and he who gives happiness, always gets happiness.” He told the prisoners that whatever has happened should be forgotten and promise God that no crimes will be committed in the future.

A person who forgives is always big (great). All human beings are God’s children and hence great souls; everyone comes to the world to do their duty. Therefore, every person should think that I was born in this world to do good deeds and not bad deeds. Take a 15-day oath, that “from today I will not hurt anyone and will start changing my mind”. Take strength from God. He said that man has been blinded with lust, which turns him away from God. If God is remembered, then He will give power, happiness and all desires will be fulfilled.

Jail Superintendent BS Batham told the prisoners that we should always think good and leave bad habits.

BK Madhuri from the local Brahma Kumaris centre,asked the prisoners to leave bad habits and start thinking good about themselves so that life will be good after getting out of jail.

At the end, literature on “positive thinking” was distributed and RajaYoga was conducted to increase the morale of the prisoners.

In Hindi:

अलीराजपुर (मध्यप्रदेश )—जिला जेल में अपराधमुक्त जीवन व्यवहार शुध्दी पर कार्यक्रम

आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी सेवाकेंद्र अलीराजपुर (मध्यप्रदेश )

जेल अधीक्षक बी एस बाथम, बी के माधुरी बहन प्रभारी स्थानीय ब्रह्माकुमारीज सेवाकेंद्र अलीराजपुर (मध्यप्रदेश ), बी के ममता राजयोग शिक्षिका अलीराजपुर, बी के रीना बहन राजयोग शिक्षिका अलीराजपुर, बी के लालू भाई अलीराजपुर, अजय भाई सोमानी , मदन भाई परवाल भी कार्यक्रम में  उपस्थित थे ।

माउंट आबू से आये हुए बी के भगवान् भाई ने कहा कि जो जैसा करता है वैसा फल पाता है। उन्होंने बताया कि हमारे मन में पैदा होने वाले विचार कर्म से पहले आते हैं। यह हमारे विचार ही तो हैं कि किसी के लिए प्यार की भावना होती है, किसी के लिए नफरत की भावना होती है। यदि आप किसी व्यक्ति से अच्छा व्यवहार चाहते हैं और उसे बदलना चाहते हैं, तो उसे दुआएं दो उसके प्रति अच्छा सोचें, तो वह भी आपको दुआ देगा। यदि आपके अन्दर किसी के प्रति नफरत है और आप उसके प्रति बुरा चाहते हैं तो वह आदमी भी आपके बारे में बुरा सोचेगा तथा आपसे नफरत करेगा। जो दूसरों को दुख देता है उसे कभी सुख नही मिलता तथा जो दुसरों को सुख देता है उसे सदैव सुख मिलता है। उन्होंने बन्दियों को बताया कि बीती बात को भुला देना चाहिए तथा आगे की सोचनी चाहिए कि हे परमात्मा मेरे से कोई बुरा कार्य न हो। गलती करने वाले से माफ करने वाला बडा होता है। बदला लेने वाला दूसरों को दुख देने से पहले अपने आप को दुख देता है। सभी इंसान ईश्वर की संतान है तथा सभी एक महान आत्मा है, सभी संसार में अपना-अपना कर्तव्य करने के लिए आते हैं। अत: प्रत्येक व्यक्ति को यही सोचना चाहिए कि मुझे अच्छे कर्म करने के लिए संसार में जन्म लिया है, न कि बुरे कर्म करने के लिए। अत: हमें सदैव अच्छे कर्म करने चाहिए। आज से 15 दिन इस बात का व्रत लो कि हे भगवान मुझे शक्ति दो, कि मैं किसी को दुख न दूं, तो आपके मन में अपने आप बदलाव आने लगेगा। उन्होंने ने बताया कि मनुष्य ने विषय वासनाओं की चादर ओढ़ी हुई है जो भगवान से वेमुख कर देती है। अगर भगवान से सर्व सम्बन्धों से याद किया जाए तो भगवान की शक्ति आ जाएगी और तन-मन में खुशी शान्ति आ जाएगी व सर्व मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएगी।

जेल अधीक्षक बी एस बाथम जी ने अपने सम्बोधन में बन्दियों को बताया कि आप जैसा सोचोगे वैसा ही बन जाओगे। अत: हमें सदैव अच्छा सोचना चाहिए तथा बुरी आदत को छोड़ देना चाहिए।

स्थानीय सेवाकेंद्र प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से आयी हुई बी के माधुरी बहन ने कहा की बताई बातों को अपने जीवन में प्रयोग करोगे तो अवश्य ही आप बुरी आदतों को छोड दोगे तथा अपने आप अच्छा सोचने लगेंगे और जेल से छुटने के बाद अच्छे नागरिक की तरह जीवन यापन करेंगे।

कार्यक्रम के अंत में सभी कैदियों को सकारात्क चिन्तन करने हेतु साहित्य भी वितरित किया गया

कैदियों का मनोबल बढ़ाने हेतु राजयोग का अभ्यास भी किया गया