“A Pledge To Live With Honesty and Purity”

Dewas, Madhya Pradesh: The annual Republic Day function was celebrated with patriotic fervour by the Spiritual Research Study and Teacher Training Center in Dewas. The function started by hoisting the Tricolour. After this the flag carrying the symbol of the Supreme Soul was unfurled. A spiritual retreat followed, wherein everyone pledged to follow a value-based lifestyle. BK Saroj from Beena said that any work done in the name of God is sure to succeed. Nothing can be achieved on the spiritual path without sacrifice and penance.

International motivational speaker and behavioural scientist as well as head of the training center, Dr. Ajay Shukla, said that most of us never think of going beyond goodness in our lives. Only a few explore being better and best. Being excellent is equally rare. Reaching this stage should be the aim of life.

Head of the Brahma Kumaris center Sartor, BK Sangeeta, urged everyone to actually implement what they have heard in this function. BK Radha from Gwalior said that purity is the most precious ornament in life. BK Krishna from Muraina said that seeds of good values must be sown in childhood when the mind is pure and fertile for best results.

BK Paanmal from Mount Abu urged everyone to give a minimum of one hour to God contemplation for miraculous results. Special invitee BK Pushpendra from Mount Abu said that like a constitution is needed for a lawful society, so is a spiritual rule book needed for a fruitful inner life. Everyone must follow one.

In Hindi:

जीवन में ईमानदारी और पवित्रता धारण करने का लिया संकल्प
तिरंगा फहराकर मनाया आध्यात्मिक अनुसंधान अध्ययन एंव शैक्षणिक प्रशिक्षण केंद्र का वार्षिकोत्सव
– आध्यात्मिक सत्संग में किया पुरुषार्थ बढ़ाने पर मंथन
सन्नौड़/बंजारी (देवास)। जीवन पथ पर सदा ईमानदारी और पवित्रता के साथ आगे बढ़ेंगे और दूसरों को भी प्रेरित करेंगे। इसी संकल्प के साथ आध्यात्मिक अनुसंधान अध्ययन एंव शैक्षणिक प्रशिक्षण केंद्र बंजारी का वार्षिकोत्सव 26 जनवरी को देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। सबसे पहले तिरंगा झंडा फहराया गया। इसके बाद शिव ध्वज फहराकर आध्यात्मिक सत्संग हुआ। इसमें सभी ने जीवन को मूल्यनिष्ठ बनाने पर मंथन किया।
कार्यक्रम में बीना से पधारीं ब्रह्माकुमारी सरोज दीदी ने अपने जीवन का अनुभव बताते हुए कहा कि जीवन में जब हम ईश्वरीय कार्य के लिए त्याग करते हैं तो परमात्मा हमें सौ गुणा मदद करते है। आध्यात्मिक मार्ग में बिना त्याग – तपस्या के पुरुषार्थ की महानता पर नहीं पहुंचा जा सकता है। जीवन को यदि श्रेष्ठ बनाना है और दिव्य गुणों से सुशोभित करना है तो त्याग-तपस्या मुख्य आधार है। इसके साथ प्रत्येक कर्म में ईमानदारी के साथ जीवन में सदा मन-वचन और कर्म की पवित्रता जरूरी है।
गुडनैस की सीमा पर पहुंचे…
आध्यात्मिक अनुसंधान अध्ययन एंव शैक्षणिक प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर व बिहेवियर साइंटिस्ट डॉ. अजय शुक्ला ने कहा कि हम सभी ने जीवन में कभी गुड से आगे बढऩे पर मंथन ही नहीं किया है। कुछ लोग बेस्ट और बेटर तक पहुंचते हैं और चंद लोग एक्सीलेंट की सीमा पर पहुंच पाते हैं। आज सभी संकल्प करें कि अब हम इसके आगे जीवन के एक लक्ष्य गुडनैस तक पहुंचनेमें अपनी ऊर्जा लगाएंगे। अपने जीवन में एक महान लक्ष्य पर पहुंचकर मंगलकारी अवस्था को पाना जीवन लक्ष्य हो।
जीवन में धारण करें ये बातें..
सन्नौड़ सेवाकेंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी संगीता बहन ने कहा कि आज सभी यहां से संकल्प लेकर जाएं कि जो बातें बताईं गईं हैं उन्हें जीवन में धारण करेंगे। श्योपुर से पधारीं ब्रह्माकुमारी तारा दीदी ने कहा कि जीवन में सबकुछ चला जाए लेकिन कभी भी सच्चाई-सफाई के साथ ईमानदारी का दामन नहीं छोड़ेंगे।
पवित्रता जीवन का शृंगार…
ग्वालियर से पधारीं ब्रह्माकुमारी राधा दीदी ने कहा कि पवित्रता जीवन का शृंगार है। यदि तन-मन-समय-संकल्पों की पवित्रता हमारे जीवन में है तो ऐसा जीवन सबस महान है। परमात्मा हम सभी बच्चों से आह्नान कर रहे हैं कि मेरे लाडले बच्चों तुम एक जन्म मेरे बताए मार्ग पर चलकर पवित्रता धारण करो मैं तुम्हें कई जन्मों का राज्यभाग्य दूंगा। मुरैना से पधारीं ब्रह्माकुमारी कृष्णा दीदी ने कहा कि बच्चे मन के सच्चे होते हैं। इसलिए बालमन में अच्छे विचारों और संस्कारों का बीजारोपण करें।
रोजाना एक घंटा ईश्वर को दें…
माउंट आबू से पधारे बीके पानमल भाई ने कहा कि ओम शांति वह महामंत्र है जिसके उच्चारण से सभी मन के विकार दूर हो जाते हैं। ईश्वर के दर पर रोजाना एक घंटे का समय जरूर दें। जीवन की भागदौड़ के बीच समय निकालकर रोज अपने लिए एक घंटा दें और स्व उन्नति करें। बीना से पधारीं बीके जानकी दीदी ने संचालन करते हुए कहा कि रोजाना परमात्मा के महावाक्यों का श्रवण हमें जीवन पथ पर चलने के लिए मार्गदर्शन करने और राह दिखाने का कार्य करते हैं। ज्ञान मुरली हमारे लिए प्रभु का पैगाम है।
अपने निजी जीवन का भी बनाएं संविधान…
ब्रह्माकुमारीज संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू से प्रकाशित शिव आमंत्रण के संयुक्त संपादक बीके पुष्पेन्द्र ने कहा कि जैसे लोगों को सुख पूर्वक जीने व समाज में व्यवस्था बनाए रखने के लिए संविधान बनाया गया है वैसे ही अपने जीवन का भी संविधान बनाएं। अपने जीवन में भी नियम, मर्यादा और कर्तव्यों को शामिल करें। मन-वचन और कर्मों को सकारात्मक, श्रेष्ठ और राष्ट्रहित में लगाने का संकल्प लें। इस मौके पर रीवा से पधारे वरिष्ठ पत्रकार रामचंद्र, उपमा शुक्ला, ग्वालियर से पधारे बीके अरविंद, मंडीदीप से पधारे शिक्षक बीके दिनेश सहित सन्नौड़, बंजारी, देवास, उज्जैन, इंदौर से पधारे नागरिकगण उपस्थित रहे।
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