55th Remembrance Day of Jagadamba Saraswati by Brahma Kumaris Hathras

Hathras ( Uttar Pradesh ): The Brahma Kumaris of Hathras observed the 55th Remembrance Day of Mateshwari Jagadamba, its First Chief Administrator, at its Tarfara Road ‘Tapasyadham’ center. Ashish Sharma, Head of Nagar Panchayat, was the Chief Guest of this occasion.

Mr. Ashish Sharma, while speaking on this occasion, said that Jagadamba Saraswati was a very sincere, cultured and nourishing personality.  Inculcating these values in our daily lives will be a befitting tribute to her.

BK Sita, Head of the Brahma Kumaris in the area, shed light on the personality of Mateshwari Jagadamba Saraswati.  She had a powerful personality.  Her inner prowess was such that one glance was enough to give peace and calm to others.  Her speech also had a magical quality to it. Her words were inspiring and transformative. She was the right hand of Brahma Baba, the founder father of the Brahma Kumaris. She lent exemplary service in spreading the message of the Supreme Soul.

BK Bhavna, Senior Rajyoga Teacher, said that she personified Goddess Saraswati, the goddess of learning and music.

BK Seema from Dauji enthralled everyone with songs dedicated to Mateshwari Jagadamba Saraswati. BK Rameshwar from Agra and BK Hardit Sharma also shared their views.

News in Hindi:

हाथरस (उ.प्र.):  तरफरा रोड़ स्थित प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय ‘तपस्याधाम’ पर आज  ब्रह्माकुमारीज  संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका  मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती जी का 55वां  अव्यक्त स्मृति दिवस मनाया गया ।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि  नगर पंचायत अध्यक्ष आशीष शर्मा जी ने कहा कि जगदम्बा सरस्वती माँ बहुत ही निष्ठावान , संस्कारित , मातृवं कि तरह पालना करने वाली , कर्तव्य परायण सदैव हाँजी  का पालन करने वाली थी । आज माँ की पुण्य स्मृति पर हम सभी उनके हर गुण विशेषताओं को जीवन में धारण कर सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करते है ।
जनपद प्रभारी ब्रह्माकुमारी सीता दीदी जी ने मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती के व्यक्तिव पर प्रकाश डालते हुए कहा की जगदम्बा सरस्वती का  व्यक्तित्व बहुत ही शक्तिशाली था। उन्होंने ऐसी स्थिति प्राप्त कर ली थी कि उनकी मात्र एक दृष्टि से सामने वाली आत्मा का मन पवित्र और शांत हो जाता था।  मम्मा की दिव्य मूरत को देखते ही क्रोधी व्यक्ति  का  क्रोध शांत हो जाता था , ऐसी थी यज्ञ माता सरस्वती जगदम्बा।
उनके शब्दों में जादुई प्रभाव था। मम्मा के वचन प्रेरणादायक व जीवन परिवर्तक थे। मम्मा यज्ञ सेवा में प्रजापिता ब्रह्मा का दाहिना हाँथ थीं। 28 वर्ष के निरंतर ज्ञान मंथन व तीव्र पुरुषार्थ के बाद, जून 1965 में मम्मा सम्पूर्ण बन गयी और विश्व परिवर्तन के महान कार्य अर्थ, शिव बाबा का दाहिना हाँथ बन सूक्ष्म वतन तक उड़ गयीं। ब्राह्मण परिवार में आज भी प्रेरणा के लिए मम्मा का जीवन, उनके गुण, वचन व कर्म याद किये जाते हैं।
वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बी.के.भावना बहन जी ने बताया जैसा कि शास्त्रों में लिखा है ,इनको संसार आदि देवी अथवा ईव के रूप में याद करता है। वेदों में सरस्वती को ज्ञान की देवी कहा गया है। अब हम यह जानते हैं कि सरस्वती, प्रजापिता ब्रह्मा की पुत्री भी हैं और जगत अम्बा भी ,जिनके द्वारा परमात्मा, हरेक की इच्छाओं को पूरा करता है। इसी कारण जगदम्बा की पूजा होती है। सभी की इच्छायें निराकार परमात्मा ही जगदम्बा के माध्यम से पूर्ण करने वाला है। आइये जानते हैं उस मनुष्य आत्मा की रूहानी यात्रा को जिसका  सबसे अधिक पूजन होता है। जिन्होंने मम्मा के साथ रह उनके गुणों को पहचानाl
दाऊजी से आयी बी.के.सीमा बहन जी ने जगदम्बा की स्मृति में सुंदर गीत गाकर सबका मन मोह लिया ।
आगरा से आये रामेश्वर भाई जी, ब्रह्माकुमार  हरिदत्त शर्मा जी ने  भी अपना वक्तव्य रखा ।

इस अवसर पर बी.के.बबिता बहन , डी.डी.गर्ग , रश्मि बहन , लक्की भाई, संगीता गर्ग , श्रीकृष्ण अग्रवाल , गोपी बहन , प्रशांत गुप्ता, आदि का विशेष सहयोग रहा ।